Wednesday, 24 August 2016

क़र्ज़ चुकाना है

पाकिस्तान मणि शंकर अय्यर को बेहद पसन्द और सलमान खुर्शीद को बलूचिस्तान हस्तक्षेप गलत लगता है |
'दोनों ही लाहौरी नमक का क़र्ज़ अदा कर रहे हैं' |

अच्छे दिन

अच्छे दिन की सबकी परिभाषा हो सकती है मेरे लिए 
सबसे अच्छा रहा शपथ ग्रहण के बाद मोदीजी का गंगा आरती में शामिल होना ,जेएनयू के गद्दारों का खुलासा ,कश्मीर में सेना को आत्म रक्षा हेतु मिले अधिकार ,कई स्कूलों में होने वाले राष्ट्रगान के अपमान का खुलासा , वीर सावरकर को राष्ट्र का पहली बार नमन , लाल किले का केसरिया होना और सबसे बड़ी बात देश भक्ति का नकाब ओढ़े सलमान खुर्शीद के मन की बात का सामने आना | मेरे अच्छे दिन तो ऐसी ही घटनाओ से परिभाषित होते हैं 
आपके ??

क्या है अपना ?

नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्तान के बारे में बात कर लक्ष्मण रेखा लांघी : पाकिस्‍तान
मुहावरे तक तो हमारे प्रयोग कर रहे हो मियां नवाज़ अपना है क्या ,
सिर्फ आतंक ???????

Sunday, 21 August 2016

एक सुझाव

'अगली बार मिलते हैं टोक्यो ओलिम्पिक में' इस वादे के साथ ओलिम्पिक का महाकुम्भ समाप्त और रियो से विदा हुए |
117 प्रतियोगी, दो पदक और 67 वाँ स्थान !!! किसी की कोई आलोचना नही न इस लायक हूँ में लेकिन एक सुझाव कि खिलाड़ियों से आशा रखे तो उन्हें सुविधाएं भी दी जाए उन्हें आज से ही चार साल बाद के लिए तैयार किया जाए खेल में मर रही खेल भावना को जीवित रखने के उपाय किये जाए ,सम्बंधित लोग कर सकते हैं पैसा भी मुझे नही लगता कोई बड़ी समस्या है और सबसे बड़ी बात अगर अधिकारी
अपने टिकट से पहले खिलाड़ी, कोच, फिजियो आदि का टिकट कटाये तो हर भारतीय आभारी होगा :)
 
जो खिलाड़ी ओलिम्पिक जैसी प्रतियोगिता में जाने का अधिकारी हो उसका परिश्रम ,लगन किसी भी मायने में कम नही हो सकता |
परिश्रम से खेलना अपना सौ प्रतिशत देना उनका काम ,जीतना उनकी आशा और परिणाम स्वीकार करना विनम्रता यही है एक खिलाड़ी की विशेषता :)
जीतने वाले खिलाड़ियों को मेरी हार्दिक बधाई लेकिन भाग लेने वाले अन्य खिलाड़ियों ने भी भारतीय ध्वज की छत्र-छाया में खूब परिश्रम दिखाया वो भी बधाई के पात्र हैं :)
सलाम सिर्फ उगते सूरज को नही , एक सलाम उन्हें भी किया जाए जो अपनी चमक दिखा अस्त हो गए जो
बेरोज़गारी के चलते कठिनता से जीवनयापन कर रहे हैं | कोई उपदेश या आलोचना नही सिर्फ 'मन की बात':-D

एक तथ्य

22 अगस्त 1921 गांधीजी ने विदेशी वस्त्रो की होली जलाई थी लेकिन एक तथ्य के अनुसार ये पावन कार्य 1906 में स्वदेशी का नारा देकर वीर सावरकर ने किया था उन्होंने सबसे पहले विदेशी वस्त्रों की होली जलाई थी |गांधी बाबा ने पुनरावृत्ति अवश्य की

Monday, 23 May 2016

गौरव के पल

भारत को अंतरिक्ष में एक और बड़ी कामयाबी, भारत को अंतरिक्ष में एक और बड़ी कामयाबी, 
पहला मेड इन इंडिया स्पेस शटल की सफल लॉन्चिंग
  श्रीहरिकोटा से इसका सफल प्रक्षेपण कर लिया है। आरएलवी पृथ्वी के चारों ओर कक्षा में उपग्रहों को प्रक्षेपित करने और फिर वापस वायुमंडल में प्रवेश करने में सक्षम है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रवक्ता ने आरएलवी-टीडी एचईएक्स-1 के सुबह सात बजे उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद कहा, ‘अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया।’ 
यह पहली बार है, जब इसरो ने पंखों से युक्त किसी यान का प्रक्षेपण किया है। यह यान बंगाल की खाड़ी में तट से लगभग 500 किलोमीटर की दूरी पर उतरा। हाइपरसोनिक उड़ान प्रयोग कहलाने वाले इस प्रयोग में उड़ान से लेकर वापस पानी में उतरने तक में लगभग 10 मिनट का समय लगा। आरएलवी-टीडी पुन: प्रयोग किए जा सकने वाले प्रक्षेपण यान का छोटा प्रारूप है।
आरएलवी को भारत का अपना अंतरिक्ष यान कहा जा रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार, यह लागत कम करने, विश्वसनीयता कायम रखने और मांग के अनुरूप अंतरिक्षीय पहुंच बनाने के लिए एक साझा हल है। इसरो ने कहा कि आरएलवी-टीडी प्रौद्योगिकी प्रदर्शन अभियानों की एक श्रृंखला है, जिन्हें एक समग्र पुन: प्रयोग योग्य यान ‘टू स्टेज टू ऑर्बिट’ (टीएसटीओ) को जारी करने की दिशा में पहला कदम माना जाता रहा है।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, इसे एक ऐसा उड़ान परीक्षण मंच माना जा रहा है, जिस पर हाइपरसोनिक उड़ान, स्वत: उतरने और पावर्ड क्रूज फ्लाइट जैसी विभिन्न अहम प्रौद्योगिकियों का आकलन किया जा सकता है। ‘विमान’ जैसा दिखने वाला 6.5 मीटर लंबा यह यान एक विशेष रॉकेट बूस्टर की मदद से वायुमंडल में भेजा गया। इस यान का वजन 1.75 टन था। आरएलवी-टीडी को पुन: प्रयोग किए जा सकने वाले रॉकेट के विकास की दिशा में एक ‘बेहद शुरूआती कदम’ माना जा रहा है। इसके अंतिम प्रारूप के विकास में 10 से 15 साल लग सकते हैं

Saturday, 23 April 2016

स्मृतियाँ

चुरा लिए हैं कुछ पल मैंने ,बचपन की स्मृतियों से 
संग सखियों के व्यय करेंगे ,अपने स्मृति कलश भरेंगे 

स्मृतियों में गोदी दादी की ,हठ है और ठिनकना है 
मक्की की सौंधी रोटी संग ,शक्कर दूध और मखना है 

ओत -प्रोत माँ की झिडकी से ,मधुर स्मृति झांकी खिड़की से 
धूल ज़रा सी और हटाई ,माँ ने कपोल पर चपत जमाई 

कमरे में हैं कई खिलौने , केरम और शतरंज जमी है 
कभी साइकिल तेज़ चल रही ,संग सखियों के रेस लगी है 

अपने इस छोटे से अँगने ,स्मृतियाँ बिखरी है हर कौने 
उचल-कूद और हाथापाई , सचमुच हो गयी कभी लड़ाई 

हल्का सा छू लिया दीवार को ,गूंजा बीता हास -परिहास 
हंसी -ठिठौली और चिढाना ,गा रहे गाना आस -पास 

रसोई देख भावुक हो आई, कलुछ हाथ माँ पड़ी दिखाई 
स्वादिष्ट और सुगन्धित व्यंजन ,करते थे सबका अभिनन्दन 

मीठी प्यारी स्मृतियों में विचरण दूर-दूर तक कर आयी
स्मृति कलश को लगा ह्रदय से वर्तमान के दर पर आयी