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Wednesday, 3 May 2023

पहलवानो का धरना

जंतर-मंतर पर खिलाड़ियों से रणनीतिज्ञ बनते पहलवान !!😡😡
सुना कुछ  'खास गुंडे' रात पहुंचा थे 🤔🤔 
धरने पर फोल्डिंग बैड भी चाहियें, पांच सितारा खाना चाहिए 😏😏 वाह !!
इन सभी को अनुशासनहीनता के चलते प्रतिबंधित करना चाहिए , अगर ये सही हैं तो क्यों राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं ??
पत्नी को कुत्ते से कटवाने वाला आज महिलाओं के लिए चिंतित है 🤔
ये वहाँ बत्तमीजी करेंगे, धक्का-मुक्की करेंगे और निरीह , लाचार बन कर खड़े हो जाएंगे 
😡😡
अब ये पहलवान नही राजनैतिक कठपुतली बन चुके हैं । 😡😡😡😡
आवश्यकता से अधिक मिल जाये तो सबको पचता नहीं ,अधिकतर का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है 😏😏😏😏

जय श्री राम
#पाखंडी 
#bajrangvineshexposed 
#wrestling 
#sports

Monday, 15 August 2022

स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव


आज के ऐतिहासिक पल,देश के नायकों को समर्पित 🙏🙏
अमृत काल रूपी 75 तक वर्ष यूँही नही आ गए 🇮🇳🇮🇳

विकास के साथ-साथ ,देश की अनेक चिंता, 
विशेषतया देश मे लगी दीमक (परिवार वाद और भ्र्ष्टाचार ) 
पर चिंता और उसके समाधान हेतु जनसमर्थन का आवाह्न का भी , 
लाल किले की प्राचीर आज साक्ष्य बन गयी🤗🤗

न जाने कितने आलोचक हैं, शत्रु हैं लेकिन हम समर्थक भी हैं
🙅🤗🤗🤗🤗

कुछ असहमतियां हैं, परन्तु हम सदैव आपके साथ हैं

जय हिंद, वन्देमातरम 👌👌
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
#amratmahotsav

Wednesday, 9 September 2020

कादम्बिनी बनी अतीत

अभी पढ़ा 'कादम्बिनी' और 'नंदन' का प्रकाशन बन्द हो रहा है 
दुखद है !!  दोनो ही स्तरीय पत्रिका रहीं ,लेकिन शायद पाठक नही जुटते होंगे 
पुस्तक प्रेमी हम भी कहाँ पढ़ पाते हैं 
कुछ समयाभाव में , जीवन की आपा-धापी तो धीरे-धीरे रुचि भी कम हो ही जाती है
अंर्तजाल की माया भी है बहुत कुछ
हमारा बचपन चंपक, नंदन,धर्मयुग, कादम्बिनी और NBT के बाल साहित्य के बीच बीता
धर्मयुग से नाता तभी टूटा जब बन्द हो गया
साप्ताहिक, शायद पाक्षिक और आकार भी छोटा हो गया था लेकिन हमने साथ नही छोड़ा
जब धर्मयुग ने मुँह मोड़ा तभी अलग हुए
साहित्य प्रेमी माता-पिता के राज में केवल पुस्तक नहीं ,अच्छे साहित्य से घनिष्टता रही 
विरासत में मिला हमें पुस्तक प्रेम , लेकिन समय - समय की बात ,  कारण बहुत से रहे ,आगे नही बढ़ पाया
पिछले कई वर्ष से नए संस्करण नही पढ़े
जब समय मिलता है , वर्षों पूर्व के संस्करण आज भी अच्छा साथ देते हैं
अगली पीढ़ी में कुछ बच्चे आगे बढ़ा रहे हैं , पता नही कब तक बढ़ेगा
पहले छुट्टियां इन्ही के साथ बीतती थीं 🤗
चर्चा इन्ही पर होती थी, यात्रा के अच्छे साथी थे
सालों पुरानी कुछ कादम्बिनी और कुछ अन्य पुस्तकें आज भी धरोहर के रूप में सुरक्षित हैं 
सम्बन्ध नही था वर्षों से लेकिन ये समाचार पढ़ा तो कुछ टूटता सा लगा 😕
कुछ पुराना समय सामने आ खड़ा हुआ 
ये भी बनने चले अतीत
समय के साथ परिवर्तन को स्वीकारना और स्मृति पोटली दबाए ,आगे बढ़ना ही जीवन है
जय सिया राम 🙏🙏

Thursday, 6 August 2020

धर्मनिरपेक्षता रूपी पाखंड

जब छोटे थे तो फिल्मी कलाकार और क्रिकेटर अलग ही दुनिया के लगते थे 
उन्हें ही मानते थे नायक-नायिका और आदर्श 
पहुंच से बाहर , कुछ पढ़ने को मिल गया और एक छवि बन गयी ,लेकिन आज नई तकनीक, नए माध्यम ,
लगता है धरती तो धरती ,ब्रह्मांड सिमट आया है आस-पास ..और जैसे मोह भंग हो गया 🙄
'दूर से सुहावने ढोल' जैसी ही बात है
 हर जगह न सब बुरे होते हैं न ही सब अच्छे 
लेकिन भारत जैसे सनातनी देश में बड़े-बड़े नाम वाले लोग कल चुप रहे 🤔
देश का इतना बड़ा दिन, सैंकड़ो वर्षों के संघर्ष के बाद #अयोध्या जगमग हुई तो मुँह पर  धर्मनिरपेक्षता का ताला लग गया 😏😏
सब कुछ व्यवसायिक दृष्टिकोण से देखा जाता है
धर्मनिरपेक्षता के आवरण में लिपटे ,बड़े स्वार्थी लोग हैं 
इस कथित धर्मनिरपेक्ष वर्ग का बहिष्कार करो😡
चाहे फिल्मी समाज हो , खेल जगत या कोई भी हो
सारे पाखंड और आदर्श पर्दे के लिए हैं 
खोखले, पाखंडी लोग 😏😏
#जय_श्री_राम
#पाखंड

Tuesday, 4 August 2020

राम मंदिर आंदोलन

1990 में हिन्दू धर्म संगठनो ने जब कारसेवा का समय नियत किया तो अयोध्या को छावनी बना दिया गया था ।
सैंकड़ों किलोमीटर पहले ही सड़कों पर अवरोधक और पहरा था 
नाम की मुलायम सरकार का कठोर आदेश था कि अयोध्या में परिंदा भी पर न मारे
कार सेवक सरकार की कड़ी निगरानी में थे जिस पर भी संदेह हुआ पकड़ो और जेल में डालो
लेकिन हमारे कार सेवक अतिरिक्त उत्साह से भरे थे
देश भर से दो-दो, 3-3 के गुट में किसान वेश धर सीधा अयोध्या कोई नही पहुंचा ।  
हफ्तों पहले से छोटी-छोटी यात्रा कर कभी बस, ट्रेन और गांवों , खेतों के रास्ते सैंकड़ों मील पैदल चल कर अयोध्या पहुंचे
रास्ते में पड़ने वाले गांवों में सत्कार भी हुआ
उन्होंने खाना ,सोने का स्थान भी दिया
आखिर राम का प्रश्न था
देश की आत्मा का प्रश्न था
सब तो मुलायम नही थे
जिस दिन कारसेवा होनी थी
अयोध्या में तूफान से पहले की शांति थी  
9-10 बजे तक शहर शांत था , जगह-जगह अवरोधक लगे थे ,सरकार अपनी सफलता पर प्रसन्न हो रही थी
कि अचानक न जाने कहाँ से लाखों कार सेवक दिवंगत अशोक सिंघल जी के नेतृत्व में चौराहे पर पहुंच गए
इस आकस्मिक अवतरण से सभी भौंचक्के थे
जय श्री राम का उद्घोष अयोध्या को रोमांचित कर रहा था
समझ से परे था इतने लोग कहाँ से आये ??

और फिर जो हुआ दरिंदगी के पार था 
अश्रु गैस, लाठी चार्ज और गोली 
गोली चलाने वाले कपड़ों से सैनिक लग रहे थे, परन्तु थे नही !!
 वो मुलायम सरकार के गुर्गे थे जो राम भक्तों को निशाना बना कर मार रहे थे

अयोध्या में खूनी होली खेली गई 😥 अशोक जी भी घायल हो गए
उस समय TV नही था , रेडियो और समाचार पत्र ही माध्यम थे 
उड़ते-उड़ते कुछ सुना , कुछ नही
हाँ ये सब जान गए कि असंख्य राम भक्तों की बलि चढ़ गई है
कई शहरों में कर्फ्यू था 
विस्तार से पढा पांचजन्य में , जहां सब कुछ विस्तार से लिखा था और वो भी चोरी से बिक रहे थे
हमें मिले और हमने पढ़े भी 😥😥
चित्र भी देखे !!
सरयू नदी न जाने कितने मृतकों के जल प्रवाह की साक्षी बनी 🙏🙏
साध्वी और आंदोलन से जुड़े लोगों के भाषण के टेप प्रतिबंधित थे
किसी एक को कुछ मिल जाता तो लोग चोरी छिपे सुनते और साझा करते
लगता था जैसे अपने नही किसी और देश में हैं और बड़े अपराधी हैं 😡😡😡😡
याद है आज भी, एक भय बना रहता था शहरों में

समय एक सा नही रहता 
आज गौरव का दिन है परंतु यहाँ तक पहुंचने के लिए अथक परिश्रम और बलिदान दिया है लोगों ने
 असंख्य है जो नहीं है , बहुत हैं लेकिन लाचार हैं 
उन सबको नमन है
ये श्रद्धांजलि है इस आंदोलन के बलिदानियों के लिए
 🙏🙏
दुर्भावना से कुछ भी करने वाले विरोधियों को भी शुभकामनाएं
उनके विरोध ने संकल्प को और दृढ़ बनाया
5 अगस्त को कोरोना के कारण हम घर बैठे ही उस अद्भुत पल के साक्षी बनेंगे 🙏🙏
अयोध्या का बदलता रूप सुखद है

निर्माणाधीन मंदिर में एक ईंट अपनी माता श्री की ओर से लगा पाएं ये इच्छा है 
और सब समय और हरि पर निर्भर

#जय_श्री_राम
#श्री_राम_मंदिर_आंदोलन
#स्मृति

ऐतिहासिक पल

5 अगस्त  अथक परिश्रम और #जनसंघर्ष के बाद
2019 में अद्भुत #संवैधानिक परिवर्तन और 2020 #धर्म की संवैधानिक विजय का #स्वर्णिम इतिहास लिखने के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा 🙏🙏
जय #मोदी सरकार
जय भारत
जय श्री राम
🇮🇳🇮🇳⛳⛳🇮🇳🇮🇳🔔🔔🇮🇳🇮🇳⛳⛳🇮🇳🇮🇳

#कश्मीर
#धारा_370
#बधाई

जय सिया राम

लगभग 500 साल तक चले #जनसंघर्ष के बाद एक आस्तिक मान्यताओं की, विवादित नगरी  विश्व मानचित्र के द्वार
जय-जय सियाराम 🙏🙏
⛳⛳🔔🔔⛳⛳🔔🔔⛳⛳🔔🔔⛳⛳
#अयोध्या
#जय_श्री_राम,

जय श्री राम

#अयोध्या में आडवाणी जी, उमा भारती या अन्य लोग अगर नही जा पा रहे हैं या निमंत्रण नही पा सके तो मुझे लगता है सही है
माना, जाने के अधिकारी हैं लेकिन परिस्थिति के अनुसार निर्णय सही 
भीड़ होना उचित नहीं
समय और परिस्थितिनुसार ही आगे बढ़ना ठीक रहता है
कोरोना काल न होता तो अयोध्या में भारत तो भारत ,विदेश से भी भक्त उमड़ पड़ते
सब प्रसन्न है 🤗
#आडवाणी जी वीडियो सन्देश दे रहे हैं 
#उमाभारती का उत्साह कम नही दिखता
फिर कोई प्रश्न न उठे तो ही उचित होगा
कल का कार्यक्रम सम्पन्न हो तो आगे 2-3वर्ष हैं निर्माण के समय कभी भी कोई भी जा सकेगा
जहां तक इकबाल अंसारी की बात है तो ये औपचारिकता आवश्यक  , सनातन धर्म की परंपरा है ये
फ़ैज़ का विरोध करती हूं लेकिन अंसारी पड़ोसी है तो ठीक है (दोनो की उपस्थिति में अंतर है)
कुछ न सोचिए बस दिवाली मनाइए ,अद्भुत पलों के आनंद लीजिए और #त्रेता के आगमन की कामना कीजिये
प्रतीक्षा है उन पलों की
ईश्वर की इच्छा सर्वोपरि 
जय श्री राम
जय-जय श्री राम 🙏

Sunday, 2 August 2020

मित्रता -'सुंदर भाव'

मित्र ,कोई दूर, कोई बहुत पास 
मित्रता बहुत सुंदर भाव । 
 जीवन के कई कदम ,कई राह , कई पड़ाव 
और एक नही अनेकों मित्र ! 
कुछ अच्छे , कुछ सच्चे , कुछ बहुत ही विशेष ! 
बचपन में कुछ मिले और बिछुड़ गये
 जिनके बस नाम और धुँधली स्मृतियों में 
कुट्टा-अब्बा सहित साथ बिताये पल हैं पास ।
कुछ संजो गये अतीत मे सुनहरी यादें 
जो हैं आज भी साथ 
 वर्तमान में बहुत सारे मित्र, आभासी संसार से लेकर वास्तविकता तक यहीं हैं आस-पास :-) 
समय चक्र घूमते हुये अपने अनुसार 
परिभाषित कर देता है नये कलेवर , नये रंग-रुप में लेकिन मूल भाव तो वही है -
 मित्रता का , दोस्ती का अपनत्व का :-) 
सभी मित्रों को शुभकामनायें

Thursday, 30 July 2020

शिक्षा नीति 2020

नई शिक्षा नीति 2020 बच्चों और अभिभावकों के लिए राहत लेकर आई है जो सम्भवतः 2021से लागू भी हो जाएगी

3 साल प्राथमिक शिक्षा से पूर्व के बच्चे मन की करें 😊
खेले-कूदें और इसी तरह सीखें

उसके बाद अंग्रेज़ी में पढ़ना अनिवार्य नहीं
अपनी मातृभाषा या राष्ट्रीय भाषा किसी में भी पढ़ सकते हैं
भाषा की अनिवार्यता तो शायद आगे तक नही है
ये एक आवश्यक व महत्वपूर्ण परिवर्तन है
बच्चे कुछ सीख तो पाएंगे

इस अंग्रेज़ी माध्यम में 60 % बच्चे रटने की विद्या में पारंगत होते जा रहे हैं 
वो न अंग्रेज़ी के ,न ही अपनी मात्र भाषा के 
बस पढ़ो और रटो ,समझने से तो मानो नाता ही नही रह गया बच्चों के एक बड़े वर्ग का 😕

कक्षा 6 से प्रतिभा विकास पर बल होगा और यहीं से व्यवसायिक शिक्षा भी आरम्भ
बहुत सराहनीय 👏👏

9 से 12 तक हर छह माह पर परीक्षा के प्रावधान का सुझाव है
 जो मुझे लगता है अत्यंत सराहनीय 

नही तो हमने कक्षा 9,10 के पूरे पाठ्य क्रम की परीक्षा कक्षा 10 के बोर्ड में
और 11 व 12 के पूरे पाठ्यक्रम की परीक्षा कक्षा 12 के बोर्ड में दी थी जो एक कठिन कार्य था
लेकिन फिर भी छात्र डट कर सामना करते 60 % आना तो मानो पहाड़ तोड़ लाये
70-80% तक पहुंचते थे हमारे सहपाठी भी😊

12 के बाद विश्वविद्यालय और कॉलेज की कटऑफ का खतरा भी समाप्त
कॉमन टेस्ट होगा और हर मेहनती बच्चा हर कॉलेज का अधिकारी हो सकता है
कई बार 12 में अच्छा परिणाम नही होता तो निराशा हाथ लगती है तो निराश होने की आवश्यकता नहीं

12 के बाद  स्नातक में सब तो नहीं लेकिन जीवन की कठिन लड़ाई लड़ रहे छात्र कई बार अर्थाभाव या किसी और परिस्थिति के चलते पढ़ाई छोड़ देते हैं 

स्नातक का 1 वर्ष किया या 2 वर्ष पढ़े और छोड़ देने पर उनकी ये पढ़ाई भी बेकार हो जाती है 
नई शिक्षा नीति ने प्रमाणपत्र, डिप्लोमा या डिग्री का प्रावधान रखा
बहुत ही अच्छा निर्णय

और भी कई निर्णय विचाराधीन हैं 
मैं जो समझी और मुझे अच्छा लगा तो साझा कर रही हूँ

इतिहास सम्बन्धी परिवर्तन पर अवश्य ध्यान देना निशंक जी , हमारे ऐतिहासिक तथ्य कुछ चोरों ने चुरा लिए
वो भी पढ़ने को मिल गए तो जीवन सफल लगेगा 😀😀



शिक्षा देश का आधार है और छात्र भविष्य
भविष्य ,आधार को दृढ़ बनाएं इसके लिए उचित समय पर उचित निर्णय अति आवश्यक
नई शिक्षा का हार्दिक स्वागत

#शिक्षामंत्रालय
#शिक्षानीति2020
#भारत

Thursday, 4 June 2020

हाँ ऐसी ही थीं माँ

---हाँ ऐसी ही थी ' माँ '...

. बात करें ४0से ५0 के दशक की तो बात कुछ ओर थी ...

उन दिनों पुरुष और महिलाओं के लिए अलग घरों में भी सीमाएं थी 

लडकियां दुपट्टा सर पर अवश्य रखती थी ...स्कूल गयीं ओर फिर घर ...पास -पडौस के सामाजिक कार्यों में अवश्य शामिल होती ......


कीर्तन , गीत -संगीत ....इसके अलावा अनावश्यक घूमना तो बेहद बुरा समझा जाता .........सबके लिए एक लक्ष्मण रेखा थी और सबको पालन करना होता था ....अनिच्छा का भी कोई प्रश्न नहीं था .......समय ही ऐसा था ...सब इच्छा से ही होता था .........

कहानी है एक लड़की की .......' माँ 'की ...!!!!!!!

आठ भाई -बहनों का भरा--पूरा खुशहाल एवं संपन्न परिवार ........तीन भाई और एक बहन से छोटी पांचवें  नंबर की संतान  बेहद  खूबसूरत , तीखा नाक -नक्श , गोरा रंग ....प्रतिभा शाली .!!!...........कंठ में सरस्वती का वास ...........वाद्य यन्त्र ..जैसे  हारमोनियम , तबला , ढोलक में पारंगत ...नृत्य के क्या कहने ..........

पाक कला में भी निपुण ....

ये कोई अतिश्योक्ति नहीं ......सत्य वचन .

ईश्वर ने सब दिया था पढने का भी बड़ा शौक था ......बड़ी बहन की शादी के बाद माता की सेहत ठीक ना रहने के कारण.पढ़ाई रोक दी गयी थी उस समय ये कोई नई बात नहीं थी , बड़ा आम था सब कुछ........

घर पर ही रह कर पढने कहा गया ..........

मन तो नहीं था लेकिन विरोध नहीं कर सकती थी,वो समय ही और था .........

कक्षा आठ तक घर पर रह  कर पढ़ाई की लेकिन जूनून ऐसा था .

.भाई -बहन सबकी किताबों का एक -एक अक्षर चट कर जाती, चाहे कोई भी विषय हो .....

फिर समय बीता .....

कुछ समय बाद एक सरकारी अफसर के साथ शादी हुई जो स्वयं पुस्तकों के शौक़ीन थे .........

ईश्वर का शुक्रिया किया कि चलो साथ मिला तो एक 

बुद्धिजीवी का !!......इसी पढने के शौक ने ज्ञान भी बढाया .......

नयी जानकारी दी ....


अपनी संतानों को भी यही सब विरासत में दिया .......जिस बात के लिए बच्चे बहस करते या परेशान होते उसे बड़ी ही सहजता से बता देती किसी शब्द का अर्थ हो या किसी व्यक्ति विशेष की जानकारी लेनी हो उनके लिए बाएं हाथ का काम था .........

कक्षा दस भी पास नहीं कर पायीं थी लेकिन पढने की ललक ने ज्ञान अर्जित कर ही लिया था ........

अच्छा साहित्य ,अच्छी पुस्तक यही साथी बने रहे .....और ..बच्चों के दोस्त आश्चर्य व्यक्त करते .....

.'तेरी मम्मी ने बताया अच्छा' ...!!!!....

बनाव-श्रंगार से भी कोई लगाव नही था बेहद साधारण और सौम्य थीं वो 

कोई  भी अवसर  होता  तो  सिर्फ  अपनी सिल्क  की क्रीम    कलर   की साडी  और हार  पहन  लेती ......अब  उस छवि  का क्या  वर्णन  करूँ  में ....

एक दम नैसर्गिक  सौन्दर्य था उनका ........

आथित्य के तो कहने क्या ....कई बार किसी के अचानक आ जाने से जब हम बहने  असहज हो  जाती  तब वो  बड़ी  ही  कुशलता  से घर  में   ही   कई सामान जुटा नाश्ता  और  खाने  का  शाही  सरंजाम  कर  देती  

हमेशा  घर  के बने  नाश्ते  को प्राथमिकता देती  थी 

कभी नाश्ता बाहर से नही आया 

कोई द्वार से कभी भूखा नहीं गया ....

.

पंछी ,..गाय, ..कुत्ते ....सबके लिए उनके यहाँ दाना -पानी था ......तीज -त्योहार , सप्ताह के सातों दिन उनका सीधा ( पूजा का सामान ) निकलता ........

कुष्ठ आश्रम के लोग एक निश्चित समय पर आते और जो बन पड़ता ले जाते

...........पडौस में किसी की कोई आवश्यकता अगर वो पूरी कर सकती तो अवश्य करती .....

वो तो बस निस्वार्थ सहायता करती .....किसी भी सीमा तक जा कर ...जो कई बार हम बच्चे पसंद नहीं करते था और उन्हें रोकने का प्रयास करते 

लेकिन वो कभी झुंझला कर और  कभी चुप रह कर अपने मन की कर ही लेती थी 

.पिता पूरा सहयोग देते कई बार हम बच्चों को मना करते ...कहते मत रोको ....करने दो .....

.दान -पुण्य भी हद से ज़्यादा होने पर पिता का यही कहना था  .....

आस्था किसी तर्क का विषय नहीं है ...

और वे हमें शांत करा देते

कई बार ऐसे अवसर आये निराशा ने आ घेरा ...लेकिन हर बार दुगने उत्साह से सामना किया 

कई बार समाज से टकराने की नौबत भी आई तो भी साहस से सामना किया .....

शायद कई बार टूटी भी !! लेकिन किसी को एहसास तक न होने दिया ...........

.....जिंदगी ने परीक्षा  कदम -कदम पर ली .....लेकिन वो जीवट महिला आगे बढती रही हर समस्या को झेलती रही ...........पति भी  साथ छोड़ गए लेकिन उसने अपने दायित्व बखूबी निर्वाह किये 

सभी दायित्व पूर्ण कर जब वो एकाकी रह गयीं तो हम बच्चों ने सोचा अब वो कुछ चैन से जी सकेंगी 

अपने मन की कर पाएंगी .लेकिन पता नहीं क्यों ..???.

जिंदगी भर जिंदगी से लोहा लेने वाली ये साहसी महिला एकांत नहीं झेल पायीं ....और एक दिन बिना मन की बात कहे इस संसार से चल निकली 

बच्चे जब तक पहुँचते  वो कोमा में जा चुकी थी .

तीन दिन तक अस्पताल में रह कर अंतिम विदा ली

 लोगो ने कहा  पुण्य आत्मा

सच में वो  पुण्य आत्मा थी 

आज वो इस दिन अपनी अनंत  यात्रा पर निकल पड़ी थी 

उस एकांत पीडिता महिला की अंतिम यात्रा में मानो आधा शहर उमड़ पड़ा था 

लोगो का सैलाब नज़र आ रहा था ...

आज हम बच्चे भी समझ रहे थे जिन बातों के लिए वो अक्सर उन्हें मना करते थे ...उसी का प्रतिफल था ये 

.ये उनकी जिंदगी भर की पूँजी थी ...

..जाना ही था उन्हें ,आज नहीं तो कल ........

लेकिन दिल आज भी कचोटता है .........

काश!! हम समय पर पहुँच जाते .!

.क्या था उनके मन में जान पाते ...

याद उसे किया जाता है जिसे भूले हों ......

वो तो आज भी हैं हमारे मन में ..

सदैव रहेंगी 🙏🙏🙏🙏........



बहिष्कृत चीन

चीन का बहिष्कार होना ही चाहिए औऱ हर राष्ट्रवादी को
अपने हिस्से की आहुति देनी पड़ेगी ये आवश्यक है !!
यहाँ विचारणीय ये है कि आज जो नारा बुलंद हुआ ,
हमारा पहला कदम है बहिष्कार की ओर 
और अब यही सही दिशा है
लेकिन बहिष्कार बोलते ही चीन भारत से भाग जाएगा
ये कुछ असम्भव सा है
कुछ अति उत्साहित देश प्रेमी भाई यही समझते हैं कि आज बोला तो चीन का नाम मिट जाएगा
ऐसा होगा पर तुरन्त नही हो सकता भाई ,
यदि इस दिशा में अग्रसर रहे तो अगले कुछ सालों में हम सफल हो जाएंगे
देश में गहरी जड़ें जमा चुका चीन उखड़ने और जाने में भी कुछ समय लेगा
हाँ अब इसका खाद-पानी बन्द होना चाहिए
जैसे अंग्रेजों को भगाने का सोचा तो समय लगा ,पर भगा ही दिया
देश व्यापी सफाई अभियान चला तो लोगों ने इस दिशा में सोचना आरम्भ किया और सफलता भी मिली
बस यही करना है हमें 
छोटे-छोटे कदम आज ही उठाने होंगे
सामान, झालर, और भी कई मशीन, app आदि सबसे दूर रहें
लेकिन अगर फोन जैसी चीज आपके पास है तो आप तुरंत उसे फेंक नही सकते पर आगे नही खरीद ने का प्रण ले सकते हैं
हाँ न ये देशद्रोह है ,न ही चीन समर्थन
एक सच है जिससे बहुत से लोग दो-चार हो रहे हैं
अब हमने ठान लिया है तो इस दुष्ट राखोस को भगा कर ही चैन से बैठेंगे

,
#बहिष्कार_चीन
#कोरोना_पीड़ित_विश्व

Sunday, 10 May 2020

हाँ ऐसी ही थीं माँ

---हाँ ऐसी ही थी 'माँ '...
बात करें ४0से ५0 के दशक की तो बात कुछ ओर थी 
उन दिनों पुरुष और महिलाओं के लिए घरों में भी अलग सीमाएं थी 
लडकियां दुपट्टा सर पर अवश्य रखती थी ...
स्कूल, घर या पास-पडौस के सामाजिक कार्यों में सम्मिलित होना, यही होता था, अनावश्यक घूमना बेहद बुरा समंझा जाता था 


कीर्तन,गीत-संगीत यही एक दुनिया थी
सबके लिए एक लक्ष्मण रेखा थी और सबको पालन करना होता था 
अनिच्छा का भी कोई प्रश्न नहीं था ......
समय ही ऐसा था,सब इच्छा से ही होता था
कहानी है एक लड़की की 
'माँ' की ...!!!!!!!
आठ भाई -बहनों का भरा--पूरा खुशहाल एवं संपन्न परिवार 
तीन भाई और एक बहन से छोटी पांचवें  नंबर की संतान  बेहद  खूबसूरत , तीखा नाक -नक्श , गोरा रंग ,प्रतिभा शाली .!!
कंठ में सरस्वती का वास ..........
वाद्य यन्त्र ..जैसे  हारमोनियम , तबला , ढोलक में पारंगत ,नृत्य के क्या कहने ..........
पाक कला में भी निपुण ....
ये कोई अतिश्योक्ति नहीं 
सत्य वचन .
ईश्वर ने सब दिया था ,पढने का भी बड़ा शौक था ...
बड़ी बहन की शादी के बाद माता की सेहत ठीक ना रहने के कारण.पढ़ाई रोक दी गयी थी उस समय ये कोई नई बात नहीं थी , बड़ा आम था सब कुछ
घर पर ही रह कर पढने कहा गया 
मन तो नहीं था लेकिन विरोध नहीं कर सकती थी
वो समय ही और था 
कक्षा आठ तक घर पर रह  कर पढ़ाई की लेकिन जूनून ऐसा था .
भाई -बहन सबकी किताबों का एक -एक अक्षर चट कर जाती, चाहे कोई भी विषय हो 
फिर समय बीता 
कुछ समय बाद एक सरकारी अफसर के साथ शादी हुई जो स्वयं पुस्तकों के शौक़ीन थे 
ईश्वर का शुक्रिया किया कि चलो साथ मिला तो एक 
बुद्धिजीवी का !!
नायब तहसीलदार के पद पर आसीन मेरे पिता पुस्तक प्रेमी थे , नियमित साप्ताहिक और मासिक पुस्तकें, पत्रिकाएं घर की शोभा बनते थे
इसी पढने के शौक ने ज्ञान भी बढाया .......
नयी-नई जानकारी दी ....


अपनी संतानों को भी यही सब विरासत में दिया 
जिस बात के लिए बच्चे बहस करते या परेशान होते उसे बड़ी ही सहजता से बता देती किसी शब्द का अर्थ हो या किसी व्यक्ति विशेष की जानकारी लेनी हो उनके लिए बाएं हाथ का काम था 
कक्षा दस भी पास नहीं कर पायीं थी लेकिन पढने की ललक ने ज्ञान अर्जित कर ही लिया था 
अच्छा साहित्य ,अच्छी पुस्तक यही साथी बने रहे .
और बच्चों के दोस्त आश्चर्य व्यक्त करते .....
'तेरी मम्मी ने बताया  ??? अच्छा' 🤔🤔.!!!!....
बनाव-श्रंगार से भी कोई लगाव नही था बेहद साधारण और सौम्य थीं वो 
कोई  भी अवसर  होता  तो  सिर्फ  अपनी सिल्क  की क्रीम कलर  की साडी  और हार  पहन  लेती अब  उस छवि  का क्या  वर्णन  करूँ  में 
एक दम नैसर्गिक  सौन्दर्य था उनका 
आतिथ्य के तो कहने क्या 
कई बार किसी के अचानक आ जाने से जब हम बहने असहज हो  जाती  तब वो  बड़ी  ही  कुशलता  से घर  में  ही कई सामान जुटा नाश्ता  और  खाने  का  शाही  सरंजाम  कर  देती  
हमेशा  घर  के बने  नाश्ते  को प्राथमिकता देती  थी 
कभी नाश्ता बाहर से नही आया 
और कोई द्वार से कभी भूखा नहीं गया ....

.
पंछी ,गाय,कुत्ते सबके लिए उनके यहाँ दाना-पानी था तीज -त्योहार , सप्ताह के सातों दिन उनका सीधा 
( पूजा का सामान ) निकलता 
कुष्ठ आश्रम के लोग एक निश्चित समय पर आते और जो बन पड़ता ले जाते
पडौस में किसी की कोई आवश्यकता अगर वो पूरी कर सकती तो अवश्य करती 
वो तो बस निस्वार्थ सहायता करती 
किसी भी सीमा तक जा कर 
जो कई बार हम बच्चे पसंद नहीं करते थे और उन्हें रोकने का प्रयास करते ,टकराव भी हो जाता था
लेकिन वो कभी झुंझला कर और  कभी चुप रह कर अपने मन की कर ही लेती थी 
पिता पूरा सहयोग देते कई बार हम बच्चों को मना करते कहते मत रोको 
करने दो 
दान-पुण्य भी हद से ज़्यादा होने पर पिता का यही कहना था  
आस्था किसी तर्क का विषय नहीं है 
और वे हमें शांत करा देते
कई बार ऐसे अवसर आये निराशा ने आ घेरा 
लेकिन हर बार दुगने उत्साह से सामना किया 
कई बार समाज से टकराने की नौबत भी आई तो भी साहस से सामना किया .....
शायद कई बार टूटी भी !! 
लेकिन किसी को आभास तक न होने दिया 
जिंदगी ने परीक्षा  कदम-कदम पर ली 
लेकिन वो जीवट महिला आगे बढती रही हर समस्या को झेलती रही 
पति भी  साथ छोड़ गए लेकिन उन्होंने अपने दायित्व बखूबी निर्वाह किये 
सभी दायित्व पूर्ण कर जब वो एकाकी रह गयीं तो हम बच्चों ने सोचा अब वो कुछ चैन से जी सकेंगी 
अपने मन की कर पाएंगी ,लेकिन पता नहीं क्यों ..???.
जिंदगी भर जिंदगी से लोहा लेने वाली ये साहसी महिला एकांत नहीं झेल पायीं 
और एक दिन बिना अपने मन की बात कहे वो अपनी अनंत यात्रा पर निकल पड़ीं
उन्हें आभास था कि उनकी महायात्रा सावन माह में ही सम्भव है तो पूरे साल कहीं भी रहें वो सावन में अपने घर ही रहती थीं
आज श्रावण की त्रयोदशी थी , भोले का जलाभिषेक कर कृपापात्र बनने का दिन
ऐसे किसी भी अवसर पर उनकी आस्था चरम पर होती थी
लेकिन आज वो अपनी अंनत यात्रा पर निकल चुकी थीं
बच्चे जब तक पहुँचते  वो कोमा में जा चुकी थी .
तीन दिन तक अस्पताल में रह कर अंतिम विदा ली
 लोगो ने कहा  पुण्य आत्मा
सच में वो  पुण्य आत्मा थी 
उस एकांत पीडिता महिला की अंतिम यात्रा में मानो आधा शहर उमड़ पड़ा था 
दूर-दूर तक जनसमूह नज़र आ रहा था 
आज हम बच्चे भी समझ रहे थे जिन बातों के लिए वो अक्सर उन्हें मना करते थे 
उसी का प्रतिफल था ये 
ये उनकी जिंदगी भर की पूँजी थी 
जाना ही था उन्हें ,आज नहीं तो कल 
लेकिन दिल आज भी कचोटता है 
काश!! हम समय पर पहुँच जाते ☹️☹️
क्या था उनके मन में जान पाते 
याद उसे किया जाता है जिसे भूले हों 
वो तो आज भी हैं हमारे मन में 
सदैव रहेंगी 🙏🙏🙏🙏........



Tuesday, 24 March 2020

कोरोनिया प्रहार

विश्व प्राकृतिक #आपदा से समय-समय पर दो-चार होता रहा है। मनुष्य का हस्तक्षेप जब भी उसके लिए असहनीय होता है वह रौद्र रूप दिखाती है और फिर किसी भी रूप में उसके कोप का भाजन बनना ही पड़ता है 😥

लेकिन हर बार जीत कर बाहर निकला ही मानव स्वभाव है 🤗
कई बार पिताजी अकालों और महामारियों के बारे में बताया करते थे 
विशेष जो उन्हें याद था 'बावनिया अकाल'☹️
जो 1952 में आया था, लोगों के चूल्हे ठप्प हो गए थे

उसी अकाल पर #बाबा_नागार्जुन की दो पंक्तियां 

'घर के अंदर दाने आये कई दिनों के बाद 
धुंआ उठा आंगन से ऊपर कई दिनों के बाद'

सबने डट कर सामना किया , लड़े और विजयी रहे
 पिताजी बताया करते थे कि जब 'बावनिया अकाल' की  लड़ाई जीत रहे थे तब गांव की औरतें गीत गाया करती थीं 

' बावनिया अकाल अब न अइयो मेरे बाखर में ...

इसी श्रंखला में प्रकृति का क्रोध आज #कोरोना के रूप में हैं
मालिनी अवस्थी जी ने सुरीली आवाज में कोरोना को हराने के लिए आवाहन किया है
ये लड़ाई पूरे विश्व की है सबको विजयी होना है लेकिन अलग-अलग लड़ कर
अलग-अलग रहने में ही एकता है

अलग रहिये और #कोरोना को हराने में योगदान दीजिए
समय पास है कोरोना को हराएंगे और
हम सब भी मिल कर जल्द ही गाएंगे

'कोरोनिया प्रहार , अब न आइयो मेरे बाखर पर....'

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

#कोरोना_को_हराना_है
#StayHome

Sunday, 22 March 2020

साधुवाद लड़ाकों

5 बजे का समय करीब 4.45 हो गया
 तय 5 मिनट 15-20 मिनट में बदल गए 👍
बोझिल वातावरण बड़ी ही प्रसन्नता और आशा से भर उठा 😊


मोदी जी ने धन्यवाद के साथ एक प्राचीन परम्परा का निर्वहन भी करा दिया
सनातनी  घण्टे, घड़ियाल और शंखनाद अकारण ही नही करते 😊 कई वैज्ञानिक तथ्य हैं इसके पीछे
लोगो ने 'कोरोना लड़ाकों' को खुले मन से साधुवाद किया 
तालियां , थालियां, घण्टी, घड़ियाल, मंजीरे और शंखनाद किया
एक उत्साहवर्द्धक वातावरण बन गया 
आशा का रूप विश्वास ने ले लिया

लड़ाई लम्बी है
अभी चलेगी बस ऐसे ही सहयोग अपेक्षित है 
सादर आभार मोदीजी 
ऐसे  वातारण के लिए प्रेरणा स्रोत आप ही हैं 

#NarendrModi
#कोरोना_को_हराना_है
#जयहिंद
#CoronaFighter

Saturday, 21 March 2020

प्रार्थना 🙏🙏

वैश्विक संकट की इस घड़ी में रोज काम कर जीवन यापन करने वाले लोगों की आवश्यकता पूर्ति के लिए वैसे तो सभी को अपने स्तर पर सहयोग करना चाहिए लेकिन 
बड़े-बड़े उद्योगपति, सिने और खेल जगत के पैसे वाले लोग आगे आ सकते हैं
ये देश सेवा में एक बड़ा सहयोग होगा

🙏🙏🙏🙏

#कोरोना_को_हराना_है
#Covid19

चीन की क्रूरता

इटली के भयावह दृश्य सामने आ रहे हैं🙁
मौत से टूट गया डॉक्टर
मृतकों से भरे सेना के ट्रक
ताबूतों से भरी मोर्चरी 😢😢
चीन से निकला काल भारत सहित पूरे विश्व में पसर रहा है 
इटली पर तो कहर बन कर टूटा 😢😢
इस भयावह स्थिति को गम्भीरता से लीजिए
हर सम्भव सहयोग सरकार को दीजिए
अपने बचाव में ही परिवार और समाज की सुरक्षा है

इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के बाद चीन को कड़ा संदेश देना आवश्यक है
बहुत हो गयी दादागिरी
पूरी दुनिया को मौत के मुहाने पर बिठा कर बच नही
 सकता
है ईश्वर सबकी रक्षा करना 🙏🙏
#Covid19
#IndiaFightCorona

Friday, 13 March 2020

नमस्ते कोरोना

#नमस्ते 🙏🙏
हमारी वर्षों पुरानी #हिन्दू_संस्कृति हमारी अपनी ही तुच्छता की भेंट चढ़ गई है
इससे से जुड़े हों या नही इसकी सार्थकता से इनकार नही कर सकते
हमारे जीवन यापन का हर तरीका #वैज्ञानिक_पध्दति पर आधारित है
जिसे हमने विदेशी आचरण के मोह- माया के अर्पण कर दिया
हमारे उठने बैठने, खाना बनाने से लेकर खाना खाने के तरीके सभी पर ध्यान दिया जाए तो ,सभी का अपना महत्व है
#नीम और #तुलसाजी के औषधीय गुण कब से हमारे लिए उपयोगी हैं
गाय माता के गोबर, गौ मूत्र , घी के महत्व से कोई सनातनी इनकार नही कर सकता
हमारी मसालों से भरी रसोई  स्वाद के अलावा औषधि का भंडार होती थी
हमारे स्वागत-सत्कार के तरीके में भी  सम्मान और स्नेह की कमी नहीं
ऐसा नही इससे हम एक दिन में दूर हो गए 
आज की पीढ़ी इन्हें जानती तक नही और अपनाने से उसे  
पिछड़ेपन का अनुभव होता है
ऐसा सबके साथ नहीं लेकिन बहुतायत है ऐसे लोगों की
अब इससे जुड़ भी रहे हैं तो विदेशी आवाहन पर 🙁
विश्व जिस समय इसका महत्व समझा दुखद है

क्या आपने कभी विचार किया है कि
प्रत्येक वर्ष रथ यात्रा के ठीक पहले भगवान जगन्नाथ स्वामी बीमार पड़ते हैं
उन्हें बुखार एवं सर्दी हो जाती है 
बीमारी की इस हालत में उन्हें Quarantine किया जाता है
जिसे मंदिर की भाषा में अनासार कहा जाता है
भगवान को 14 दिन तक एकांतवास
 यानी  Isolation में रखा जाता है

आपने ठीक पढ़ा है 14 दिन ही Isolation की इस अवधि में भगवान के दर्शन बंद रहते हैं एवं भगवान को जड़ी-बूटियों का पानी आहार में दिया जाता है 
यानी Liquid Diet और यह परंपरा हजारों साल से चली आ रही है

अब इक्कीसवीं सदी में पश्चिमी लोग हमें पढ़ा रहे हैं कि
Isolation & Quarantine का समय 14 दिन होना चाहिए

वो हमें ऐसा पढ़ा सकते हैं क्योंकि
*हम स्वयं सोचते हैं कि हिंदू धर्म अन्धविश्वास से भरा हुआ अवैज्ञानिक धर्म है*

जो आज हमें पढ़ाया जा रहा है
हमारे पूर्वज हजारों साल पहले से जानते थे
*गर्व करो अपने धर्म पर*
*अपनी सभ्यता पर और अपनी परंपराओं पर*

परन्तु अच्छा है विश्व में सावधानी के चलते 
लोग भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं 
नमस्ते #Covid_19

#कोरोना

Sunday, 21 August 2016

एक तथ्य

22 अगस्त 1921 गांधीजी ने विदेशी वस्त्रो की होली जलाई थी लेकिन एक तथ्य के अनुसार ये पावन कार्य 1906 में स्वदेशी का नारा देकर वीर सावरकर ने किया था उन्होंने सबसे पहले विदेशी वस्त्रों की होली जलाई थी |गांधी बाबा ने पुनरावृत्ति अवश्य की

Friday, 9 May 2014

शहादत का डंका पीटने वाली भारत की विदेशी सरकार की एक और पोल खुली----!!!



'उन्होंने दावा किया कि
नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मौत 17 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी.
नेताजी 20 अगस्त 1945 को बर्मा में छितांग नदी के किनारे पड़े मिले थे.
जापान के सैनिकों ने उन्हें वहां से उठा लिया था.
इन आंखों ने जापानी सैनिकों द्वारा नेताजी को उठाकर ले जाते हुए देखा है.
सरकार ने बगैर मेरा बयान दर्ज किए ही नेताजी की मौत की अफवाह उड़ा दी.'

कर्नल' निज़ामुद्दीन की युवावस्था की तस्वीर
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वाराणसी के रोहनिया की रैली में पैर छू कर आशीर्वाद लिया नरेंद्र मोदी ने
सुभाष चंद्र बोस के ड्राइवर और अंगरक्षक रह चुके हैं 
कर्नल निजामुद्दीन और इनकी उम्र 115 साल. मंच पर मोदी ने इनका सम्मान किया.

नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मौत 17 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी.
नेताजी 20 अगस्त 1945 को बर्मा में छितांग नदी के किनारे पड़े मिले थे.
जापान के सैनिकों ने उन्हें वहां से उठा लिया था.

कर्नल' निज़ामुद्दीन का घर, जिसके ऊपर तिरंगा लगा हुआ है.

यह दावा किसी और का नहीं, 114 वर्षीय कर्नल निजामुद्दीन का है.

कर्नल निजामुद्दीन उन दिनों नेताजी के निजी ड्राइवर व अंगरक्षक थे.
निजामुद्दीन बुधवार को काशी विद्यापीठ में विशाल भारत संस्थान द्वारा आयोजित समारोह में भाग लेने आए थे.
इस दौरान उन्होंने बताया कि नेता जी को अंतिम बार उन्होंने खुद बर्मा की छितांग नदी के किनारे देखा था.

उन्होंने दावा किया कि इन आंखों ने जापानी सैनिकों द्वारा उन्हें उठाकर ले जाते हुए देखा है.
सरकार ने बगैर मेरा बयान दर्ज किए ही नेताजी की मौत की अफवाह उड़ा दी.
कर्नल ने बताया कि नेता जी 12 सिलेंडर वाली गाड़ी से चलते थे.
वह बेहद साधारण तरीके से रहते थे.
सुरक्षा के नाम पर उनके साथ मात्र तीन चार लोग थे.
मैं उनकी गाड़ी चलाता था.
साक्ष्य के तौर पर उन्होंने आजाद हिंद फौज का परिचय पत्र भी दिखाया.

11 भाषाओं के जानकार हैं कर्नल
कर्नल निजामुद्दीन की हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, जर्मन, जापानी, बांग्ला सहित ग्यारह भाषाओं पर पकड़ हैं.

अचूक निशानेबाज
कर्नल अचूक निशानेबाज भी माने जाते हैं.
उन्होंने बताया कि सन 1945 में युद्ध के दौरान ब्रिटिश जहाज मार गिराया था.

नेताजी के कहने पर लौट आया.--------
मुबारकपुर आजमगढ़ के ग्राम ढकवां निवासी कर्नल निजामुद्दीन पांच जून 1969 में सिंगापुर से भारत लौटे.
उन्होंने बताया कि
 सिंगापुर में फंसे सभी भारतीयों को वापस भेजने के बाद नेताजी ने लौटने का आदेश दिया था.
नेताजी के आदेश पर ही हम भारत आ गए.