Showing posts with label मन की बात. Show all posts
Showing posts with label मन की बात. Show all posts

Tuesday, 15 October 2019

यादें

#यादें
#शरदपूर्णिमा
#चन्द्रमा
#अमृत
#बचपन
बचपन जैसी न चांदनी ,न चन्द्रमा ,न वो खुला सा आँगन और न ही शरद का अनुभव :) शरद कम ग्रीष्म ज़्यादा :)
स्मृति की गर्त हटाती हूँ तो दूध वाली बड़ी सी डोलची में मम्मी की बनाई स्वादिष्ट खीर जाली से ढकी है और आँगन में कपड़े सुखाने वाले तार पर बन्धी है ,सर्द अहसास है वहीं चटाई बिछा शॉल ओढ़े हम सब विराजमान हैं :) 
हंसी मज़ाक ,हल्ला-गुल्ला 
 इस सबके बीच हाथ में धागा और सुई !!
चांदनी के धवल प्रकाश में सुई में धागा डालना है जिससे आँखों की रोशनी तेज़ हो सके | ये प्रक्रिया बार-बार दोहरानी है और फिर ये क्या !! यहां तो प्रतिस्पर्धा शुरू हो गयी 'मेने 30 बार तूने 20 बार 2-3 घण्टे इसी तरह बीत गए ,आँखें बोझिल हो चलीं आलस आने लगा तो चलो खीर अंदर रखे चटाई उठाये और चले निद्रा देवी के आगोश में :) सुबह स्वादिष्ट अमृतमयी खीर का प्रसाद वितरण होगा |
ये थी शरद पूर्णिमा की मधुर स्मृति :-D
सभी मित्रों को शरद पूर्णिमा की गुनगुनी शुभकामनाएं |

Monday, 20 November 2017

हमारा इतिहास हमारा सम्मान

#BanPadmawatiMovie 
एक -दो दिन से कई पोस्ट पढ़ चुकी हूँ कि 
आज की महिलाओ के मान-सम्मान से दूर लोग इतिहास में अटके हैं 
आज की नारी का सम्मान हो न हो पद्मावती के सम्मान की चिंता है 
मुझे लगता है नारी इतिहास की हो ,आज की हो या भावी सम्मान सभी महिलाओ का आवश्यक और उतना ही महत्वपूर्ण। 
इतिहास का सम्मान भी उतना ही आवश्यक जितना वर्तमान का
इतिहास के प्रति उपेक्षा भाव भी ठीक नहीं ,हमारा इतिहास जड़ें हैं हमारी ,कोई व्यक्तिगत तो कोई राष्ट्रीय ,जड़ विहीन पनपता है क्या कोई ?
और जहां तक बात विरोध की तो भंसाली का इतिहास ही देख लीजिये हर फिल्म में कुछ न कुछ विवादास्पद दिखाता है ,
एक बार फिल्म रिलीज़ हो जाने पर क्या कुछ बदल पायेगा ?
बच्चे वही सच मान बैठते हैं इस लिए आवश्यक है सही तथ्य सही तरीके से सामने आना
हम व्यक्तिगत स्तर पर सोचे और हमारे दादा -दादी पर कोई गलत टिप्पणी करे तो कैसा लगेगा हमें
मुझे लगता है विरोध का तरीका गलत हो सकता है लेकिन बात सही है
चोर है भंसाली के मन में ,
भंसाली ने फिल्म दिखने का वादा किया तो दिखाता क्यों नहीं
आदत बन गयी है उसकी, गलत- सही बनाओ और दिखाओ
किसी मुगल आक्रांता पर फिल्म बना कर क्यों नहीं दिखाता ,?
नहीं दिखा सकता फतवे से डर लगता है

Sunday, 25 December 2016

सोच विचार

किसी की भावना को आहत करने का कोई इरादा नहीं 
त्यौहार जीवन की एकरसता को ताज़गी और ख़ुशी से भर देते हैं ,सर्व धर्म समभाव की विचार धारा वाले वाले इस देश में असंख्य त्यौहार मनाये जाते हैं 
कोई भी त्यौहार मनाने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए 
अगर आपकी ख़ुशी में कोई शामिल होता है तो आपका भी कर्तव्य है उसकी खुशियां बढ़ाई जाएँ
लेकिन अपने आप खुशियों में शामिल होने और थोपने में बहुत अंतर है 
कोई आपकी खुशियों को तो दीमक की तरह चट कर खोखला करता जाएं और अपनी खुशियों को सर पर सवार कर दे तो आपके पास आक्रोश के अलावा कुछ बचता है क्या ?????
यही हो रहा है होली ,दीवाली पर प्रदूषण, पानी औए नकली मिठाई का शोर मचा ऐसा कर देते हैं कि नयी पीढ़ी तो तौबा करती नज़र आती है
 हाँ आज क्रिसमस झूम कर मनाएगी ,नए साल के लिए कार्यक्रम बन रहे होंगे अभी से
 उस समय होने वाली आतिशबाजी भी लगता है पर्यावरण में सुधार लाती है ??
और ये परिणाम है सालों विदेशी सोच वाली सरकार के सत्ता में बने रहने का,जिसने भारतीय संस्कृति को छिन्न-भिन्न करने में कोई कसर नहीं छोड़ी,वामपंथ को बढ़ावा दिया और ईसाइयत का बीज गहराई तक रोप दिया जो अब वट वृक्ष बन गया है
UPA के दस साल ने तो देश को इटली बनाने का पूरा प्रयास किया और अगर समय रहते परिवर्तन न होता तो पता नहीं अभी और क्या हो रहा होता ??????
क्रिसमस ट्री के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई भी किसी को खराब नहीं लगती 
अब तो  फादर जॉन जैसे लोग टीवी पर आकर ऐसे आँख दिखाते हैं जैसे ईसाई धर्म भारत का मूल धर्म हो 

Thursday, 20 October 2016

#यादेंशरदपूर्णिमा

#यादेंशरदपूर्णिमा#चन्द्रमा#अमृत#
बचपन जैसी न चांदनी ,न चन्द्रमा ,न वो खुला सा आँगन और न ही शरद का अनुभव :)शरद कम ग्रीष्म ज़्यादा :)
स्मृति की गर्त हटाती हूँ तो दूध वाली बड़ी सी डोलची में मम्मी की बनाई स्वादिष्ट खीर जाली से ढकी है और आँगन में कपड़े सुखाने वाले तार पर बन्धी है ,सर्द अहसास है वहीं चटाई बिछा शॉल ओढ़े हम सब विराजमान हैं :) 
हंसी मज़ाक ,हल्ला-गुल्ला 
इस सबके बीच हाथ में धागा और सुई !!
चांदनी के धवल प्रकाश में सुई में धागा डालना है जिससे आँखों की रोशनी तेज़ हो सके | ये प्रक्रिया बार-बार दोहरानी है और फिर ये क्या !! यहां तो प्रतिस्पर्धा शुरू हो गयी 'मेने 30 बार तूने 20 बार 2-3 घण्टे इसी तरह बीत गए ,आँखें बोझिल हो चलीं आलस आने लगा तो चलो खीर अंदर रखे चटाई उठाये और चले निद्रा देवी के आगोश में :) सुबह स्वादिष्ट अमृतमयी खीर का प्रसाद वितरण होगा |
ये थी शरद पूर्णिमा की मधुर स्मृति :-D
सभी मित्रों को शरद पूर्णिमा की गुनगुनी शुभकामनाएं |


Monday, 26 September 2016

सिंधु जल समझौता

# सिधुजलसंझौता
DNA देखा तो समझ आया कि----
दुनिया का पहला जल समझौता जिसमें विश्व बैंक का हस्तक्षेप !
अगर जल रोकते हैं तो कोई प्रबन्ध नही ,
बाँध बनाना भी चाहे तो 10-15 साल चाहिए |
अब प्रश्न ये कि कश्मीर समस्या हो या सिंधु समझौता
, हर समस्या को सुलझाने के लिये पंचायत का हस्तक्षेप क्यों ?
 इस समस्या को जन्म देने और इसे बेहद जटिल बनाने वाले ही आज 'कुछ करो-कुछ करो' चिल्ला रहे हैं ये और बात है कि 60-65 सालों में भी इस दिशा में कदम उठा कोई बाँध तक नही बना पाये जो आज रोके गए पानी की व्यवस्था कर पाते | ये कोई आज की समस्या तो है नहीं |
खैर अब पानी रोकना तो एकदम शायद सम्भव नही तो निर्णय कुछ सेंध लगाने और पानी पिला-पिला कर मारने का ही लगता है

Wednesday, 14 September 2016

हिंदी दिवस

हिंदी भाषी प्रदेश से हूँ
हिंदी को प्यार करने वाले परिवार से हूँ ,हमेशा माता -पिता को अपना खाली समय पुस्तकों के बीच बिताते देखा
 एक छोटा सा पुस्तकालय भी देखा जो स्थानानुसार एक अलमारी में हमेशा बना रहा .........
जहाँ हम बच्चों के लिए भी हिंदी मासिक, पाक्षिक और अनेक पत्रिकाओं का प्रबंध हमेशा रहा ........
.हिंदी की क्लिष्टता को समझना और सहज भाव से अपनाना सिखाया लोकप्रिय लेखिका 'शिवानी' ने ........
जिनके दर्जनों उपन्यास आज भी हमारी धड़कन बने हैं ...
आज हमारे बीच नहीं हैं ...लेकिन उनकी लेखनी उनकी उपस्थित का सदा आभास देती रहेगी ........
हिंदी के हर शब्द को अपनाना स्वभाव में सम्मिलित रहा है ......
हिंदी भाषी समाचार पत्र की वर्ग पहेली भरना प्रिय शगल रहा .........
.शिक्षा--दीक्षा सरकारी स्कूल में हुई जहाँ एक सहज भाषा बोलते रहे ..
.लेकिन हिंदी माध्यम में कक्षा आठ के बाद हिंदी विषय पढने को नहीं मिला क्यों कि नियमानुसार विज्ञान वर्ग के लिए हिंदी विषय नहीं था 
लेकिन कोई असर नहीं हुआ ...............
आज भी हिंदी ही प्राथमिकता है .......

.जिस स्कूल में अध्यापन कर रही हूँ  वहां पहले अंग्रेजी पर ही ध्यान दिया जाता था जैसा कि सब जानते हैं हिंदी को गौण बना रखा था .......
.लेकिन में सुविचार हिंदी में लिखने प्रारम्भ किये तो उन्होंने मना करवा दिया .........
मैंने उनसे बात की और कहा जो भी हम श्यामपट पर लिखे वो कम से कम समझ आना चाहिए ........
हम लिख देते हैं कोई ध्यान नहीं देता ........
.कम से कम सप्ताह में तीन दिन हिंदी में भी लिखवाइए ........
उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया ...........
फिर उनकी बेटी ने स्कूल जाना प्रारंभ किया तो उन्हें लगा शायद मेरा कहना सही था ..........
और उन्होंने मेरी बात को मान लिया ...........
हिंदी का लेख भी सुधरवाने पर ध्यान दिया जाने लगा

जब में वहां बोलती थी तो कई अध्यापिका जो हिंदी भाषी नहीं थी कहती आप की हिंदी बहुत अच्छी है ...में मन में सोचती अगर आप उत्तर प्रदेश जाइए तो ऐसी ही अच्छी हिंदी आपको हर मुख से मिलेगी ...........
आज हिंदी दिवस पर मन में ये सब उमड़ आया .............
हिंदी मेरी पहचान है ........
.मेरा अभिमान है .........
भारत की शान है ..........
बस मेरी इस राष्ट्र भाषा को अपमानित ना होना पड़े कहीं .........
इसके सम्मान को बचाए रखना है और नयी पीढ़ी को भी इसकी अहमियत समझानी होगी
आज हिंदी दिवस पर समस्त हिंदी प्रेमियों को अनेक शुभकामनाएं ........

हिंदी को जानिये ................
जय हिंदी ...जय हिन्दुस्तान ............:)))))))))...........

Wednesday, 24 August 2016

क़र्ज़ चुकाना है

पाकिस्तान मणि शंकर अय्यर को बेहद पसन्द और सलमान खुर्शीद को बलूचिस्तान हस्तक्षेप गलत लगता है |
'दोनों ही लाहौरी नमक का क़र्ज़ अदा कर रहे हैं' |

अच्छे दिन

अच्छे दिन की सबकी परिभाषा हो सकती है मेरे लिए 
सबसे अच्छा रहा शपथ ग्रहण के बाद मोदीजी का गंगा आरती में शामिल होना ,जेएनयू के गद्दारों का खुलासा ,कश्मीर में सेना को आत्म रक्षा हेतु मिले अधिकार ,कई स्कूलों में होने वाले राष्ट्रगान के अपमान का खुलासा , वीर सावरकर को राष्ट्र का पहली बार नमन , लाल किले का केसरिया होना और सबसे बड़ी बात देश भक्ति का नकाब ओढ़े सलमान खुर्शीद के मन की बात का सामने आना | मेरे अच्छे दिन तो ऐसी ही घटनाओ से परिभाषित होते हैं 
आपके ??

क्या है अपना ?

नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्तान के बारे में बात कर लक्ष्मण रेखा लांघी : पाकिस्‍तान
मुहावरे तक तो हमारे प्रयोग कर रहे हो मियां नवाज़ अपना है क्या ,
सिर्फ आतंक ???????

Sunday, 21 August 2016

एक सुझाव

'अगली बार मिलते हैं टोक्यो ओलिम्पिक में' इस वादे के साथ ओलिम्पिक का महाकुम्भ समाप्त और रियो से विदा हुए |
117 प्रतियोगी, दो पदक और 67 वाँ स्थान !!! किसी की कोई आलोचना नही न इस लायक हूँ में लेकिन एक सुझाव कि खिलाड़ियों से आशा रखे तो उन्हें सुविधाएं भी दी जाए उन्हें आज से ही चार साल बाद के लिए तैयार किया जाए खेल में मर रही खेल भावना को जीवित रखने के उपाय किये जाए ,सम्बंधित लोग कर सकते हैं पैसा भी मुझे नही लगता कोई बड़ी समस्या है और सबसे बड़ी बात अगर अधिकारी
अपने टिकट से पहले खिलाड़ी, कोच, फिजियो आदि का टिकट कटाये तो हर भारतीय आभारी होगा :)
 
जो खिलाड़ी ओलिम्पिक जैसी प्रतियोगिता में जाने का अधिकारी हो उसका परिश्रम ,लगन किसी भी मायने में कम नही हो सकता |
परिश्रम से खेलना अपना सौ प्रतिशत देना उनका काम ,जीतना उनकी आशा और परिणाम स्वीकार करना विनम्रता यही है एक खिलाड़ी की विशेषता :)
जीतने वाले खिलाड़ियों को मेरी हार्दिक बधाई लेकिन भाग लेने वाले अन्य खिलाड़ियों ने भी भारतीय ध्वज की छत्र-छाया में खूब परिश्रम दिखाया वो भी बधाई के पात्र हैं :)
सलाम सिर्फ उगते सूरज को नही , एक सलाम उन्हें भी किया जाए जो अपनी चमक दिखा अस्त हो गए जो
बेरोज़गारी के चलते कठिनता से जीवनयापन कर रहे हैं | कोई उपदेश या आलोचना नही सिर्फ 'मन की बात':-D

Tuesday, 19 April 2016

अच्छा प्रयास

नई सरकार बनने के बाद अब तक तीन ऐतिहासिक चीज़ें जो किसी भी कारण से बाहर थी वापस देश आ चुकी हैं !
2015 अक्टूबर----जर्मनी के चांसलर ने दसवी शताब्दी की माँ दुर्गा की मूर्ति वापस की जो 1990 में चोरी हुई थी और 2012 में जर्मनी के संग्रहालय में पायी गयी थी |
कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री 'स्पिफैन हार्पर' ने 'पैरट लेडी' नामक मूर्ती वापस की और ऑस्ट्रेलिया के तब के प्रधानमन्त्री टोनीएबट ने भारत दौरे के दौरान भारतीय पुरात्तव विभाग को उसके महत्व की चीज़ें लौटाई थी |अगर भारत कोहिनूर लाने में सफल रहता है तो एक और सफलता होगी |



Saturday, 2 January 2016

इण्डिया नहीं भारत

एक प्रयास हम सब कर सकते हैं 
भारतवर्ष या भारत को इंडिया कहने से तो बचना होगा 
विशेषतया आज की पीढ़ी से गुज़ारिश इंडिया कहना बन्द कर दें देश हित में तो अच्छा नही बहुत अच्छा रहेगा
इसका अर्थ भी कोई अच्छा सन्देश नही देता 
भारत कितना सुंदर शब्द है 'भारत'!!!!
सोचना तो सरकार को भी चाहिए कितनी भी लम्बी प्रक्रिया हो लेकिन इस दिशा में कदम अवश्य उठाना चाहिए
वैसे हम अपने स्तर पर तो भारत कहना शुरू कर ही सकते हैं
जय भारत जय भारती वंदे मातरम्

Thursday, 4 September 2014

गुरु उत्सव

कदम-कदम पर समय-समय पर अनेक शिक्षकोँ का मार्ग दर्शन ही यहाँ तक ले आया । 
कई लोगोँ का स्थान हमारे मन मेँ विशिष्ट बन जाता है वो हमेशा याद रहते हैँ लेकिन योगदान सबका होता है ।
 प्राइमरी स्कूल से लेकर काँलेज तक की यात्रा रोचक रही , ज्ञानवर्द्धक रही बहुत स्मरणीय रही । 
बहुत से लोगोँ का सहयोग मिला आज नही जानती कौन कैसे हैँ ,कहाँ हैँ ..????
लेकिन अपने सभी शिक्षकोँ की , गुरुजनोँ की,मार्ग दर्शकोँ की ह्रदय से आभारी हूँ , कृतज्ञ हूँ।

जय हो मेरे सभी गुरुजनोँ की 

गुरु उत्सव

कल मोदीजी के भाषण हेतु व्यवस्था और आलोचना के बीच हुआ वाद-विवाद  कल बहुत से आलोचकोँ के बीच शायद फिर वाद-विवाद का वातावरण हो 
लेकिन मैँने सिर्फ मोदीजी को सुनने का निर्णय किया है  
वैसे आज बस मेँ मैने बहुत से बच्चों से पूछा कल जाओगे या छुट्टी ? जायेँगे आँटी ! 
मन से या डर कर ? आँटी मन से जायेँगे  कल 12 बजे जाना है...:)

Wednesday, 14 May 2014

कद्दावर नेता

जी न्यूज़ पर सुमित अवस्थी ने देश के मज़बूत प्रधानमंत्रियों की लिस्ट ज़ारी की ..
नेहरु जी , इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी ..............
इसी श्रेणी में आगे कद्दावर नेता नरेन्द्र मोदी ......

भाई मेरा भूल गया नाटे कद के सबसे बड़े शास्त्री जी को जिन्होंने 
डेढ़ साल की सत्ता में ही कमाल किये 

और हमारे अटल जी !! जिन्होंने दुनिया के दादा दम्भी अमेरिका की परवाह किये बिना ही परमाणु परिक्षण कर डाले थे ....................

निकलो सुमिता भाई और नेताओं के नाम सही -सही याद करो .

Sunday, 21 July 2013

अहा !!! स्वादिष्ट

लेखा -जोखा

'मोदी ने ग्यारह सालों में गुजरात में क्या किया' .......माकन 

अब सूप तो ठीक छलनी का सवाल गले नहीं उतरता 
ग्यारह साल के रिपोर्ट कार्ड से पहले 66 साल का लेखा हो जाए 'साहब' ........????

.. शरद यादव का बिहार में बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों का दौरा

........नाव तैयार .....
चमचे आस-पास ........नौका विहार पर चले .................रास्ते में काजू-किशमिश और बढ़िया बिस्किट का नाश्ता ..........कुछ देर निंदिया रानी ने भी आगोश में ले लिया .....चारों और पानी ही पानी था .........ठंडी हवा थी ..बड़ा अच्छा लग रहा था 
......लुत्फ़ आया ही था कि........एक किनारे कुछ भूखे - नंगे बच्चे और और मजदूर से दिखने वाले लोग दिखने लगे .....उफ्फ्फ ये लोग भी न !!!!!!!...
सब कुछ आनंद विहीन लगने लगा कहाँ से आ गए ये लोग ...??
............किसी ने कान में कहा
'सर हम बाढ़ पीड़ित गाँव में आ गए हैं ..........!!!!!!!!.............'
ओह !! चौंक उठे मंत्रीजी ......................................
.................................................. शरद यादव का बिहार में बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों का दौरा

क्या होगा ?

टैक्सी और आटो वाले बैज पहनेँगे ,लिखा होगा-"I RESPECT WOMEN "
.................................................................. - FROM----पर्यटन मंत्रालय 
और बड़ी गाड़ियोँ मेँ घूमते बिगड़े दिल शहज़ादे कौन सा बैज लगायेँगे !! 
उनका का कया होगा ?

Tuesday, 11 June 2013

प्रिन्सिज़

प्रभलीन तुम्हे लेकर कई बार बड़ा भावुक हो जाती हूँ
शायद जानती हो तुम भी !!
पिछले दिनों तुम्हारी कुछ तस्वीरें देखी मुझे इतनी अच्छी लगी कि रुका ही नहीं गया मुझसे  प्रिन्सिज़ ...:)
तुम बहुत अच्छी लग रही हो उनमें ...और ये पंक्तियाँ तुम्हारी शान में ... :)

मेरी राजदुलारी सी हो
सुन्दर गुडिया प्यारी सी हो
शब्द कोष अब रिक्त हो चला
इस जग में तुम न्यारी सी हो ||

मनभावन परिधान पहनती
गरिमा जिसमें एक झलकती
दिल को बड़ा सुकून मिला है
कीचड में एक कमल खिला है ||

मुस्कान तेरे चेहरे पर छाई
जिसने सारी कथा सुनाई
मर्यादा रिश्तों में देखी ,हाव-भाव शालीन
छू गया अंदाज़ तुम्हारा ,सच कहूँ प्रभलीन........