Thursday, 23 October 2014

दीपावली आप सबके लिये मंगलमय हो, शुभ हो ....

परंपरागत दीप का भारतीय प्रकाश ही चहुँ ओर फैलायेँगे ! 
मिष्ठान भी देसी ही खायेँगे खिलायेँगे ।
दीपोत्सव मिल कर मनायेँगे !
दीपों का ये पर्व सबके लिए ढेरों खुशियाँ ले आये 
दीपावली आप सबके लिये मंगलमय हो, शुभ हो




Sunday, 14 September 2014

हिंदी दिवस पर ---------

















१-पंख फैलाए बांह पसार 
हिंदी पहुंची जन -जन द्वार 
२-अभिव्यक्ति को सरस बनाए 
सामर्थ्य की झलक दिखाए .
३-मान राष्ट्र भाषा का पाया 
हर दिल में स्थान बनाया 
४-लम्बी है अभी बहुत लड़ाई
साथ जुड़े जन ताकत आई
५-माँ समझे हर हिंदी भाषी
हिंदी है इतनी अभिलाषी
६-दुनिया भर में बनी है हिंदी भारत की पहचान
हम सबका कर्तव्य बना अब दिलाये इसको मान ...........

दुनिया भर के सभी हिंदी भाषियों को शुभकामनाएं ..................:))))

Thursday, 4 September 2014

गुरु उत्सव

कदम-कदम पर समय-समय पर अनेक शिक्षकोँ का मार्ग दर्शन ही यहाँ तक ले आया । 
कई लोगोँ का स्थान हमारे मन मेँ विशिष्ट बन जाता है वो हमेशा याद रहते हैँ लेकिन योगदान सबका होता है ।
 प्राइमरी स्कूल से लेकर काँलेज तक की यात्रा रोचक रही , ज्ञानवर्द्धक रही बहुत स्मरणीय रही । 
बहुत से लोगोँ का सहयोग मिला आज नही जानती कौन कैसे हैँ ,कहाँ हैँ ..????
लेकिन अपने सभी शिक्षकोँ की , गुरुजनोँ की,मार्ग दर्शकोँ की ह्रदय से आभारी हूँ , कृतज्ञ हूँ।

जय हो मेरे सभी गुरुजनोँ की 

गुरु उत्सव

कल मोदीजी के भाषण हेतु व्यवस्था और आलोचना के बीच हुआ वाद-विवाद  कल बहुत से आलोचकोँ के बीच शायद फिर वाद-विवाद का वातावरण हो 
लेकिन मैँने सिर्फ मोदीजी को सुनने का निर्णय किया है  
वैसे आज बस मेँ मैने बहुत से बच्चों से पूछा कल जाओगे या छुट्टी ? जायेँगे आँटी ! 
मन से या डर कर ? आँटी मन से जायेँगे  कल 12 बजे जाना है...:)

Saturday, 23 August 2014

मैं मुंबई से प्रभलीन------------

कल रात (23.8.14) रात 12.4 का समय था लाईट नहीं थी , मैं  यूँही फोन पर FB खोल रही थी ...........
अचानक फोन बज उठा ........मैंने उठाया ............
हेल्लो ....
आप अरुणा जी बोल रही हैं ......?
जी ....
आप अरुणा सक्सेना जी बोल रही हैं .....?
जी हाँ ..........आप ???
मैं मुंबई से प्रभलीन संधू बात कर रही हूँ ....(एक मीठी आवाज़ )........!!!!!!
मैं हैरान ..!!!!!!        .....क्या ??
कोई मज़ाक तो नहीं ......?????....सच में प्रभलीन संधू ...??
हाँ जी कोई मज़ाक नहीं ,सच है मैं आप से बात कर रही हूँ ...........
और अगले आधे घंटे मेरे पैर ज़मीन पर नहीं थे .........
मैंने किस तरह बात की ,क्या कहा ....कुछ याद नहीं
हाँ उसने मेरे बनाए पेज की प्रशंसा में ज़रूर कहा ....
अपने कुछ ख़ास प्रशंसकों 'शुभम श्रीवास्तव' ,
'निधि भूषण' और 'दीक्षा शर्मा' को याद किया ..........
उसने बताया कि अज तक उसने "आपकि अंतरा" नहीं देखा
'हम तो काम करते हैं और बस' ....................:)
है न कमाल ........?????
मैंने कहा अगर तुम टी वी पर आओगी तो तुम्हारे फेन ज़्यादा खुश होंगे ....
बोली ............'आफ़र तो हैं पर अभी मैं फिल्म करना चाहती हूँ' ..........

............करीब 30 मिनट बात हुई
लेकिन मेरे लिए वो आधा घंटा  बड़ा 
महत्वपूर्ण .......स्मरणीय........स्वर्णाक्षरों में लिखा जाने वाला रहा .....:)
#Prabhlein Sandhu
तुमने मेरे प्यार और अपनेपन का बहुत खूबसूरत सिला दिया प्रिन्सिज़ !!!
बड़ा प्यारा था तुम्हारा सरप्राइज़ , बहुत ही बढ़िया
तुमने जो कुछ किया लाजवाब था हमेशा की तरह..|
मुझे एक अनमोल सौगात दी..........:)















..............प्रभलींन के संपर्क में मैं करीब चार साल से हूँ ,
करीब और करीब होती जा रही हूँ हमेशा उसे मैसेज करती हूँ, वो भी अक्सर जवाब देती है 
कई बार मैसेज पर बात करती है .........
मैं हमेशा उससे अनौपचारिक बात करती हूँ .....
कल भी मैंने उससे बिना किसी ओपचारिकता के बात की
मुझे पूरा सम्मान देती है .....
मुझे लगा ही नहीं मैंने तुमसे पहली बार बात की प्रभलीन....:)
हाँ बहुत कुछ था कहने को पर ज़्यादा कह नहीं पायी .........ऐसा होता है अक्सर .......!!
बहुत दिन से उससे मिलने या फोन पर बात करने का मन था....
एक सपना है वो मेरे घर आये लेकिन ..लेकिन ...लेकिन .........
मिलना तो अभी संभव नहीं था मैंने उससे फोन पर बात करने की इच्छा ज़ाहिर की और कल अचानक वो दिन आ गया

एक बात कहूँ # Prabhlein Sandhu मुझे विश्वास था कि एक दिन ऐसे ज़रूर आएगा
 कब .........? ?     ये नहीं मालूम था .....:)
बस एक ही बात कहनी है कि तुम सही मायने में सैलिब्रिटी हो ....:)
 तुम्हारी निगाहें  आसमान पर और कदम ज़मीन पर हैं .......
जो सफलता का मूल मंत्र है .....
मैं खुश ......बहुत खुश  तुम्हारे लिए ...........













शुक्रिया , .धन्यवाद , आभार प्रिन्सिज़ .
मुझे याद करने के लिए .मेरी एक इच्छा को पूरा करने के लिए ......

सचमुच बहुत अच्छी हो तुम ............बस ऐसे ही कभी -कभी याद करती रहना ..:).....
और तुम्हारी एक अमानत है मेरे पास ........

'मेरे हाथ का प्यार से बना खाना !!!!
स्वाद हो न हो पर प्यार से और मन से बना हुआ'............

वो अमानत तो तुम्हे ले ही जानी होगी कभी न कभी देखते हैं कब आता है वो दिन .......??????..............हा हा हा ......... 
मेरा ढेर सारा प्यार और शुभकामनाएं हमेशा तुम्हारे साथ हैं, हमेशा रहेंगी .......
अपने क्षेत्र में आगे , आगे और और आगे बढती जाओ ........खूब नाम कमाओ ...........:))))))

Saturday, 9 August 2014

स्नेह--सूत्र

स्नेह-सूत्र सज उठा कलाई पर , 
अभिमान बहन को हुआ भाई पर 
बने साक्षी अक्षत रोली , 
घेवर ने मिठास है घोली 
स्मृतियों की आँख मिचौली 
नयन बोलते अश्रू बोली 

गले मिल रहे बहन-भाई 
रक्त-सम्बन्ध ने ली गहराई
हर रिश्ते की आन तू रखना
भाई मेरा मान तू रखना

भावुकता ने भाई को घेरा 
बहन तू सम्मान  है मेरा !
राखी पर्व आ गया भाई
आप सबको बहुत बधाई  



Wednesday, 30 July 2014

तीज

झूला झूलें पेंग बढाये
मीठा -मीठा घेवर खा
याद पुरानी ताज़ी हो गयीं .
सावन की ये तीज मनाएं

Photo: झूला झूलें पेंग बढायें
मीठा -मीठा घेवर खाए 
याद पुरानी ताज़ी हो गयीं .
सावन की ये तीज मनाएं

Saturday, 14 June 2014

मुड़ कर देख हमें भी लेना

मुड़ कर देख हमें भी लेना 
हम तो अब भी वहीँ खड़े हैं
 १-वही नीम है वही चौराहा
 वही बना विछोह गवाह 
उसी कुए की चौड़ी मुंडेर पर
 राह तकते हुए खड़े हैं 
२-बंधन था जो मन से अपना 
साथ -साथ देखा था सपना
 बिखरे टूट गए सपनो की
 छोटी किरचों बीच खड़े हैं 
३-बचपन की वो मधुर स्म्रतियां 
यहीं भरी थी स्वप्न उड़ान
 खँडहर घरोंदा याद दिलाता
 यहीं हमारी गहन जड़ें हैं 
४-आवागमन बसन्त-पतझड़ का
 ग्रीष्म-शीत का आना जाना 
बिना आकलन रहे झेलते 
क्रूर समय का हर प्रहार 
डोरी का वो एक सिरा हम
अब भी पकडे हुए खड़े हैं .......!!!!

Wednesday, 14 May 2014

कद्दावर नेता

जी न्यूज़ पर सुमित अवस्थी ने देश के मज़बूत प्रधानमंत्रियों की लिस्ट ज़ारी की ..
नेहरु जी , इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी ..............
इसी श्रेणी में आगे कद्दावर नेता नरेन्द्र मोदी ......

भाई मेरा भूल गया नाटे कद के सबसे बड़े शास्त्री जी को जिन्होंने 
डेढ़ साल की सत्ता में ही कमाल किये 

और हमारे अटल जी !! जिन्होंने दुनिया के दादा दम्भी अमेरिका की परवाह किये बिना ही परमाणु परिक्षण कर डाले थे ....................

निकलो सुमिता भाई और नेताओं के नाम सही -सही याद करो .

Friday, 9 May 2014

शहादत का डंका पीटने वाली भारत की विदेशी सरकार की एक और पोल खुली----!!!



'उन्होंने दावा किया कि
नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मौत 17 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी.
नेताजी 20 अगस्त 1945 को बर्मा में छितांग नदी के किनारे पड़े मिले थे.
जापान के सैनिकों ने उन्हें वहां से उठा लिया था.
इन आंखों ने जापानी सैनिकों द्वारा नेताजी को उठाकर ले जाते हुए देखा है.
सरकार ने बगैर मेरा बयान दर्ज किए ही नेताजी की मौत की अफवाह उड़ा दी.'

कर्नल' निज़ामुद्दीन की युवावस्था की तस्वीर
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वाराणसी के रोहनिया की रैली में पैर छू कर आशीर्वाद लिया नरेंद्र मोदी ने
सुभाष चंद्र बोस के ड्राइवर और अंगरक्षक रह चुके हैं 
कर्नल निजामुद्दीन और इनकी उम्र 115 साल. मंच पर मोदी ने इनका सम्मान किया.

नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मौत 17 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी.
नेताजी 20 अगस्त 1945 को बर्मा में छितांग नदी के किनारे पड़े मिले थे.
जापान के सैनिकों ने उन्हें वहां से उठा लिया था.

कर्नल' निज़ामुद्दीन का घर, जिसके ऊपर तिरंगा लगा हुआ है.

यह दावा किसी और का नहीं, 114 वर्षीय कर्नल निजामुद्दीन का है.

कर्नल निजामुद्दीन उन दिनों नेताजी के निजी ड्राइवर व अंगरक्षक थे.
निजामुद्दीन बुधवार को काशी विद्यापीठ में विशाल भारत संस्थान द्वारा आयोजित समारोह में भाग लेने आए थे.
इस दौरान उन्होंने बताया कि नेता जी को अंतिम बार उन्होंने खुद बर्मा की छितांग नदी के किनारे देखा था.

उन्होंने दावा किया कि इन आंखों ने जापानी सैनिकों द्वारा उन्हें उठाकर ले जाते हुए देखा है.
सरकार ने बगैर मेरा बयान दर्ज किए ही नेताजी की मौत की अफवाह उड़ा दी.
कर्नल ने बताया कि नेता जी 12 सिलेंडर वाली गाड़ी से चलते थे.
वह बेहद साधारण तरीके से रहते थे.
सुरक्षा के नाम पर उनके साथ मात्र तीन चार लोग थे.
मैं उनकी गाड़ी चलाता था.
साक्ष्य के तौर पर उन्होंने आजाद हिंद फौज का परिचय पत्र भी दिखाया.

11 भाषाओं के जानकार हैं कर्नल
कर्नल निजामुद्दीन की हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, जर्मन, जापानी, बांग्ला सहित ग्यारह भाषाओं पर पकड़ हैं.

अचूक निशानेबाज
कर्नल अचूक निशानेबाज भी माने जाते हैं.
उन्होंने बताया कि सन 1945 में युद्ध के दौरान ब्रिटिश जहाज मार गिराया था.

नेताजी के कहने पर लौट आया.--------
मुबारकपुर आजमगढ़ के ग्राम ढकवां निवासी कर्नल निजामुद्दीन पांच जून 1969 में सिंगापुर से भारत लौटे.
उन्होंने बताया कि
 सिंगापुर में फंसे सभी भारतीयों को वापस भेजने के बाद नेताजी ने लौटने का आदेश दिया था.
नेताजी के आदेश पर ही हम भारत आ गए.

Thursday, 1 May 2014

बधाई

चिलचिलाती धूप मेँ खून के कतरे को पसीना बना बहा देने वाले ! 
हाड़ गला ,रक्त जमा देने वाले शीत मेँ मौसम को चुनौती देने वाले ! 
ज़िँदगी के मोर्चे पर पल-पल चुनौती स्वीकार कर जंग जीतते हर मेहनत कश योद्धा को मेरा सलाम । 
परिवर्तन हो या न हो आज का दिन हर मेहनती इंसान का है

Wednesday, 23 April 2014

विश्व पुस्तक दिवस पर बधाई और शुभकामनाएं .

आज विश्व पुस्तक दिवस है. 
यूनेसको ने 1995 में इस दिन को मनाने का निर्णय लिया,

हम तो हमेशा पुस्तकों के बीच रहते थे ,

आज भी पुरानी स्म्रतियां ताजगी लिए हैं ये बात और ....
कि स्कूली कम और मनोरंजक ज़्यादा ...............

बड़ा ही 'सुन्दर संसार' है पुस्तकों का लेकिन समय ने इस संसार से दूरी बना दी है .........उपलब्धता कम हुई .....रुचि कम हुई ...परिणाम स्वरुप कल्पना शक्ति कम हुई ....
समय बड़ा बलवान ...समय को सलाम ....जो कराये कम है .............
अब इतना पाठन नहीं हो पाता लेकिन आज भी पसंद है पुस्तकों की निराली दुनिया .....
विश्व पुस्तक दिवस पर बधाई और शुभकामनाएं ............... 


Tuesday, 22 April 2014

धरा बची तो ही बचेंगे ........


धरा बची तो ही बचेंगे
नहीं तो सब ठिकाने लगेंगे ...

अरुणा सक्सेना's photo.

१-जल प्रदूषित , थल प्रदूषित
चहुँ ओर है हवा प्रदूषित
श्वास तोडती धरा हमारी
नील गगन का रंग प्रदूषित

२-पर्यावरण में विष घुला है
प्रकृति में भी घुन लगा है
सात रंग का इंद्र धनुष भी
रंगहीन लगने लगा है
३-वृक्ष अब कटने लगे है
वन्य जीव बेघर हुए हैं
ऊँची-ऊँची इमारतों से
कंक्रीट के वन बने हैं


४-हम सब मिल करें प्रयास 

पेड़ लगाएं आस -पास 
डूब रही नैया को अपनी 


ले आयें 
साहिल के पास 

५-पेड़ क्यों न हम लगाएं 
हरियाली को पुनः जगाएं 
पर्यावरण का संरक्षण कर 
वसुंधरा का क़र्ज़ चुकाएं |
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Tuesday, 8 April 2014

श्रद्धांजलि-----

मंगल पांडे की चिंगारी भड़की शोला बनकर
कफ़न बाँध चल पड़े दीवाने भगवा वस्त्र पहन कर

भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अग्रणी योद्धा मंगल पांडे

जिनके द्वारा शुरू की गई क्रांति की ज्वाला से ईस्ट इंडिया कंपनी की नीव हिल गयी 
और एक छोटी सी चिंगारी ऐसी भड़की कि परिणति अंग्रेज मुक्त भारत के रूप में हुई ..........
उनकी पुण्य तिथि पर राष्ट्र का कोटि-कोटि नमन ..............
..

Sunday, 30 March 2014

नवसंवत्सर २०७१ की हार्दिक शुभकामनायें

रवि नवल की रश्मियाँ लायी स्नेहिल स्पर्श 
पल-पल हो खुशियों भरा , सफल रहे संघर्ष

Sunday, 16 March 2014

उपेक्षित कपडे

बारह साल बाद घूरे के दिन भी बदलते हैं और 
आज दिन बदला है उन कपड़ों का जो आज तक आपकी उपेक्षा झेल रहे थे ......
आज दिन है उनके इतराने का ...आज मुबारक बाद उन्हें भी ......

होली का हुड्दंग

१-दहन हो गया बैर-भाव का रात होलिका संग 
कई रंग के साथ में ,भंग की तरंग 
२-दही-बड़े मिल रहे गले, स्वाद नया बनाए 
रंगों के त्योहार को ,आओ मिल मनाएं 
३- साथ-साथ में दिख रहे , कई रंग के गुलाल 
माथे पर लगते मिटे ,मन के सभी मलाल 
४- बिखर रहा है इधर-उधर , सात रंगों का प्यार
पिचकारी की कह रही सतरंगी बौछार
५- -थोडा सा गुलाल यहाँ ,सब के लिए ले आई
सतरंगी त्योहार की ,सब मित्रों को बधाई
६--होली पर हम व्यस्त हैं ,काम -काम और काम
आशीष सभी छोटो को ,बड़ों को प्रणाम .........................

आप सभी मित्रों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं .........
होली जम कर मनाएं और सुरक्षित मनाएं .........


Monday, 27 January 2014

"ऎ मेरे वतन के लोगों" --स्वर्ण जयंती

देशभक्ति गीत "ऎ मेरे वतन के लोगों" की स्वर्ण जयंती पर आज लता जी भी भावुक हैं ........
उन्होंने ट्विट कर अपनी भावनाए ज़ाहिर की हैं ........
..........27 जनवरी, 1963 को उन्होंने पहली बार गाया था ये गीत .....
...........कविवर 'प्रदीप' के इस एतिहासिक दर्द भरे गीत की प्रासंगिकता भारत ने
एक पल के लिए भी नहीं खोई..........समय-समय पर शहादत होती रही ..........
............लेकिन सिर्फ गीत ही बजता रहा ..........
.........आँख में पानी परिवार के अलावा शायद ही किसी ने भरा हो ............
इस भावुक देश-भक्ति गीत के लिए भारत सदा आभारी रहेगा पूरी टीम का
कविवर प्रदीप जी ,संगीतकार सी रामचंद्रन और मीठी आवाज़ वाली हमारी लता दीदी .........
आपके सामूहिक प्रयास ने भारत के दर्द को संगीत मय बना हर दिल तक पहुंचाया

Saturday, 25 January 2014

सिसकता-ठिठुरता राष्ट्र


हमारा सिसकता-ठिठुरता राष्ट्र एक बार फिर से तैयार है 'गणतंत्र दिवस' मनाने के लिए .... ज़र्ज़र आधार शिला को उपेक्षित कर उपरी हिस्सा नये रंग-रोगन और चमक -दमक के साथ गर्व से इतराएगा ...... ........शहीदों को याद कर सम्मान और श्रधांजली एक निर्वाह भर है ..................समय की मांग तो है ही और बहुत आवशयक लगता है कि आज ६४ साल पुराना संविधान संशोधित हो .......
६४ साल के बाद प्राथमिक तीन आवश्यकताएं भी जनता की पूरी नहीं हो पायी हैं ........विकास की परिभाषा बदल चुकी है ..........कल राजपथ पर भारत दुनिया को चका-चौंध कर देगा कोई संदेह नहीं इसमें..............
.....इसके पीछे कितनी सिसकियाँ हैं कितने आंसू छिपे हैं किसी को आवश्यकता नहीं जानने की ......???
लेकिन सब कमियों और सब अवगुणों के बाद भी ये हमारा अपना घर है , हमारा अपना देश है .......और मुझे गर्व है कि में भारतीय हूँ .............
इसे गोरों के चंगुल से मुक्त कराने हेतु असंख्य वीर वीरगति को प्राप्त हुए ............कुछ तो आज तक इतिहास में ही खोये हैं ...लेकिन हम उन्हें दिल से नमन कर सकते हैं ,उन्हें याद कर सकते हैं ............उन सभी वीरों को भारत का कोटि -कोटि नमन ..........जय हिन्द ...............
..................वन्दे मातरम्...............


Friday, 24 January 2014

कैसी ये तृष्णा.

आंखों में झिलमिलाते स्वप्न 
..........साकार होते देखने हेतु जिंदगी भर संघर्षरत बढ़ते पग .........
................बढ़ते समय के साथ कुछ टूटते , कुछ साकार स्वप्न .........
...........सफलता और असफलता के बीच झूलते ,पल -पल जीते ................
.........अचानक जब खाली हाथ आया पंछी ,खाली हाथ ही नीड छोड़ उड़ जाता ............
...............छोड़ अपना आधा-अधूरा घर-बार .......बड़े से सा प्रश्न चिन्ह के साथ ..!!!!
...........तब लगता !!! कैसी ये तृष्णा..??...क्या यही है संसार ???

Friday, 17 January 2014

......ये भी जिंदगी ---













शीत भयंकर आज पड रहा सोच रही एक अबला 
मेरे नन्हे के तन पर है नाम मात्र का झबला 

नील गगन के साए में वो कथरी में लिपटा है 
गर्मी पाने की चाहत में अपने में सिमटा है 

सजल नेत्र से देखा माँ ने ,बांहों में उठाया 
गोदी में ममता से लेकर ,सीने से लगाया 


भींच लिया माँ ने नन्हे को ,दो आंसू टपकाए
छिपा लिया माँ ने आँचल में ,उष्मा कुछ मिल जाए

बेरहमों की दुनिया में नन्हे ,क्या करने तुम आये
सो गया बेफिक्र हो नन्हा , सीनें में मुँह छिपाए

Monday, 13 January 2014

मकर संक्रान्ति का ऐतिहासिक महत्व


माना जाता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। 

चूँकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है।
 महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रान्ति का ही चयन किया था। 
मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिल गयी थीं।

शुभ हो

मकर संक्रांति , पोंगल पर्व आप सबके लिए शुभ हो ,मंगल कारी हो ........
जय उत्तरायणी ...............शुभम