Friday, 21 June 2019

हमारी प्राचीन विरासत

#योग
#अन्तर्राष्ट्रीययोगदिवस
हमारे जीवन की दिनचर्या का एक-एक क्रिया कलाप विज्ञान पर आधारित है
हमारा उठना-बैठना,खाने-पीने का तरीका,चलना यहां तक बच्चों के खेलने के पुराने तरीके भी वैज्ञानिक हैं
 आधुनिकता की अंध दौड़ और विलासी जीवन की चाह में हम इससे विमुख हुए और लगभग हर व्यक्ति अनेक बीमारियां पाले बैठा है यहां तक बच्चे भी इससे अछूते नही
बाबा रामदेव ने योग और लोगो के बीच सामंजस्य बिठाने का प्रयास किया जो कहीं न कहीं सफल भी रहा

मोदी जी ने 2014 में इसे संयुक्त राष्ट्र से मान्यता दिला कर इसकी खोई प्रतिष्ठा को वापस लाने का प्रयास किया
बहुत से विरोध और समर्थन के बीच आज योग ,भारत में ही नही विश्व में पांव पसार रहा है

ये सिर्फ व्यायाम नही ,चिकित्सा पद्दति पर आधारित व्यायाम है
ये हमें मानसिक बल देता है
आपको स्वस्थ रखता है आपको चुस्त बनाता है
अपने देश की इस प्राचीन पद्दति को सम्मान दें और स्वस्थ रहें

आज हमारे योग समूह 'मानव रचना योग केंद्र' ने सुबह योग दिवस बहुत उत्साह से मनाया 🙂🙂
करीब 80-90 मिनट का कार्यक्रम बहुत सफल रहा
योग दिवस कार्यक्रम में भागीदारी करते हुए बेहद गर्व का अनुभव हो रहा है 👌👌

पाँचवे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

जय हिंद
वन्दे मातरम
जय श्री राम  🙏🙏

योग अपनाएं , अपने को स्वस्थ रखे

Tuesday, 16 April 2019

गुज़ारिश

देश हित में मोदीजी को वोट करें

Sunday, 17 March 2019

श्रद्धांजलि

पर्रिकर जी को भाव भीनी श्रद्धांजलि🙏🙏

Friday, 5 January 2018

लघु रामायण

आओ आओ एक बात बताएं , बहुत पुरानी  कथा सुनाएँ
त्रेता युग की है कहानी , नहीं किसी से है अनजानी


नदी एक सरयू थी बहती , दुःख-सुख अवध नगर के कहती
नगर अयोध्या थी  खुशहाल , पा दशरथ को थी निहाल
माता तीन पिता थे एक , उत्तराधिकार का था मतभेद



कैकई का क्रोधी अंदाज़ , राम नहीं हो भरत को आज राजा हारे रानी जीती , वचनबद्धता  प्रीती से जीती 
राम -लखन और पत्नी सीता , चले निभाने रघुकुल रीता
चित्रकूट और पंचवटी , यहीं रहे और बनी कुटी
१४ वर्ष का समय बहुत था , आशीर्वाद सभी का संग था
पिता चल दिए पुत्र वियोग में ,अयोध्या पूरी डूबी शोक में
अवध के घटना क्रम से बेखबर , भरत गए थे नाना के घर
घटना जान हो गए आहत , गद्दी की कभी नहीं थी चाहत

भरत चले भ्राता को लाने संग अयोध्या चली मनाने
भरत पादुका ही ला पाए , वचन भाई का तोड़ न पाए
समय हो रहा था व्यतीत , १४ वर्ष गए थे बीत
  सौष्ठव राम-लखन का भाया , 
विवाह प्रस्ताव सूपर्णखां  का आया
सहमत नहीं हुए जब भाई , 
सूपर्णखा की दिखी सच्चाई
वार सिया पर नहीं सह पाए
नासिका विहीन बनी निशचरी
क्रोधित लक्ष्मण रुक  नहीं पाए
सूपर्णखाँ ने  व्यथा सुनाई बदला लेने पहुंचे भाई
सबको मौत के घाट उतारा , तुरंत सभी का किया निपटारा
मोहित स्वर्ण मृग पर सीता , बुद्धि विनाश काल विपरीता
राम चले लाने मृग छाला  , लखन सिया का था रखवाला
करूं पुकार दी  एक सुनाई , राम पुकारे लक्ष्मण भाई
सुन पुकार सीता घबराई , रेखा खींच चल दिए भाई
साधू वेश में रावण आया , भिक्षा मांगी द्वार बजाया
सीता का फिर हरण कर  लिया , वायु मार्ग से लंका चल दिया
गिद्ध जटायु बचाने आया , रावण ने उसको मार गिराया
राम भटकते सीता की खोज में , जटायु मिल गया थड़ा था होश में
पानी पिया  वृतान्त सुनाया , और जाने का मार्ग  दिखाया
राम को मिलास संग वानर का , लंका पर कर  दी चढ़ाई
भीषण युद्ध हुआ उस युग में, चिन्ह आज तक पड़ें दिखाई
अंत हुआ रावण का और सीता से मिले रघुराई
लंका  राज विभीषण को दे राम को याद आया घर-बार
लखन सिया हनुमान चले पुष्पक विमान से अयोध्या द्वार
अभिनन्दन करने राम का उमड़-उमड़ अयोध्या आयी
खूब नगाड़े बजे नगर में अपार हर्ष और खुशियां छायी
घी के दीप जले घर-घर में ,हर द्वारे थी दीप कतार
छोटे-बड़े सभी जन खुश थे दीपावली की थी बहार
प्रथा चल पड़ी दीवाली की , हर्षोल्लास और खुशहाली  की
हर वर्ष  उल्लास  से दीप जलाएं , दीपोत्सव जम कर मनाएं

Friday, 15 December 2017

लौह भाई पुरुष सरदार वल्लभ

लौह भाई पुरुष सरदार वल्लभ पटेल को शत -शत नमन 🙏



सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1948 में उप-प्रधानमंत्री पद से अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी थी. इस संबंध में 12 जनवरी, 1948 को उन्होंने महात्मा गांधी को पत्र लिखा था. मगर गांधी की मंजूरी नहीं मिलने के कारण वह इस्तीफा नहीं दे सके. सरदार पटेल गांधी युग के उन चंद नेताओं में शामिल थे जो सिर्फ सत्ता सुख भोगने के लिए नहीं बल्कि अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए जनसेवा के लिए सरकार में जाते थे. यदि किसी कारणवश वो जनसेवा नहीं कर पाते थे तो उनका पद खुद उन्हें बोझ लगने लगता था.
सही अर्थों में सच्चे देश भक्त और सेवक थे लौह पुरुष पटेल
 

Sunday, 10 December 2017

निष्पक्षता

निष्पक्ष चुनाव की दुहाई देते हुएता  समस्त विपक्षी दल EVM का विरोध कर मतपत्र से चुनाव के पक्ष में हैं
कल एक चैनल पर 'मतपत्र' की निष्पक्षता पर मोहर लगाते एक वरिष्ठ पत्रकार को सुना
८० के दशक में चुनाव के बाद एक ट्रक मतपत्रों से भरी पेटियां लेकर चला तो उसी नंबर का एक और ट्रक ठप्पे लगे मतपत्रों की पेटियां लिए खड़ा था जिसने पुराने ट्रक को रिप्लेस किया
उनका कहना था इस बात को सब जानते हैं काफी हल्ला हुआ लेकिन कोई सबूत किसी के पास नहीं था इसलिए कुछ नहीं हुआ
अब इससे ज़्यादा निष्पक्षता भी कहीं हो सकती है भला ?

निद्रा


१-रात्री आगाज़ 
चहकती नींद ने
पाँव पसारा
२-तम हराया 
टिमटिमाती लौ ने
विजयी दीप
३-झुकी पलकें
निंदिया आगमन
चिंतन मुक्त
४-असहनीय
अँधेरे का सन्नाटा
भोर प्रतीक्षा
५-खामोश रात
माँ की लोरी सुरीली
पलकें भारी
६-बंद आँखे
गहरी निद्रा आई
सजे सपने