Sunday, 10 December 2017

निष्पक्षता

निष्पक्ष चुनाव की दुहाई देते हुएता  समस्त विपक्षी दल EVM का विरोध कर मतपत्र से चुनाव के पक्ष में हैं
कल एक चैनल पर 'मतपत्र' की निष्पक्षता पर मोहर लगाते एक वरिष्ठ पत्रकार को सुना
८० के दशक में चुनाव के बाद एक ट्रक मतपत्रों से भरी पेटियां लेकर चला तो उसी नंबर का एक और ट्रक ठप्पे लगे मतपत्रों की पेटियां लिए खड़ा था जिसने पुराने ट्रक को रिप्लेस किया
उनका कहना था इस बात को सब जानते हैं काफी हल्ला हुआ लेकिन कोई सबूत किसी के पास नहीं था इसलिए कुछ नहीं हुआ
अब इससे ज़्यादा निष्पक्षता भी कहीं हो सकती है भला ?

निद्रा


१-रात्री आगाज़ 
चहकती नींद ने
पाँव पसारा
२-तम हराया 
टिमटिमाती लौ ने
विजयी दीप
३-झुकी पलकें
निंदिया आगमन
चिंतन मुक्त
४-असहनीय
अँधेरे का सन्नाटा
भोर प्रतीक्षा
५-खामोश रात
माँ की लोरी सुरीली
पलकें भारी
६-बंद आँखे
गहरी निद्रा आई
सजे सपने

Monday, 20 November 2017

हमारा इतिहास हमारा सम्मान

#BanPadmawatiMovie 
एक -दो दिन से कई पोस्ट पढ़ चुकी हूँ कि 
आज की महिलाओ के मान-सम्मान से दूर लोग इतिहास में अटके हैं 
आज की नारी का सम्मान हो न हो पद्मावती के सम्मान की चिंता है 
मुझे लगता है नारी इतिहास की हो ,आज की हो या भावी सम्मान सभी महिलाओ का आवश्यक और उतना ही महत्वपूर्ण। 
इतिहास का सम्मान भी उतना ही आवश्यक जितना वर्तमान का
इतिहास के प्रति उपेक्षा भाव भी ठीक नहीं ,हमारा इतिहास जड़ें हैं हमारी ,कोई व्यक्तिगत तो कोई राष्ट्रीय ,जड़ विहीन पनपता है क्या कोई ?
और जहां तक बात विरोध की तो भंसाली का इतिहास ही देख लीजिये हर फिल्म में कुछ न कुछ विवादास्पद दिखाता है ,
एक बार फिल्म रिलीज़ हो जाने पर क्या कुछ बदल पायेगा ?
बच्चे वही सच मान बैठते हैं इस लिए आवश्यक है सही तथ्य सही तरीके से सामने आना
हम व्यक्तिगत स्तर पर सोचे और हमारे दादा -दादी पर कोई गलत टिप्पणी करे तो कैसा लगेगा हमें
मुझे लगता है विरोध का तरीका गलत हो सकता है लेकिन बात सही है
चोर है भंसाली के मन में ,
भंसाली ने फिल्म दिखने का वादा किया तो दिखाता क्यों नहीं
आदत बन गयी है उसकी, गलत- सही बनाओ और दिखाओ
किसी मुगल आक्रांता पर फिल्म बना कर क्यों नहीं दिखाता ,?
नहीं दिखा सकता फतवे से डर लगता है

Friday, 3 November 2017

खिचड़ी हुई ग्लोबल

दिल्ली में 3 से 5 नवंबर तक वर्ल्ड फू़ड फेस्टिवल ...
अब भारतीय पतीली के साथ-साथ पूरी दुनिया में फैलेगी, भारतीय पारंपरिक खिचड़ी की सौंधी महक 🙂🙂🙂
देसी घी के साथ गर्मागर्म खिचड़ी का स्वाद लगभग हर भारतीय की जुबां पर होगा लेकिन अब जल्दी ही पूरी दुनिया इस स्वाद का लुत्फ उठाने वाली है

'खिचड़ी' अमीर हो या गरीब, हर रसोई की शान है 
किसी थाली में चटनी,पापड़ ,घी ,अचार के साथ तो किसी थाली में बिन अचार ही शोभा बढ़ाती है
लेकिन ये खिचड़ी है 😊 जब पकती है तो बड़े-बड़े चेहरों पर मुस्कान ले आती है
आशा है ये खिचड़ी की सौंधी महक दूर तक जायेगी ,मुंह में पानी ज़रूर ले आएगी

Sunday, 25 December 2016

सोच विचार

किसी की भावना को आहत करने का कोई इरादा नहीं 
त्यौहार जीवन की एकरसता को ताज़गी और ख़ुशी से भर देते हैं ,सर्व धर्म समभाव की विचार धारा वाले वाले इस देश में असंख्य त्यौहार मनाये जाते हैं 
कोई भी त्यौहार मनाने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए 
अगर आपकी ख़ुशी में कोई शामिल होता है तो आपका भी कर्तव्य है उसकी खुशियां बढ़ाई जाएँ
लेकिन अपने आप खुशियों में शामिल होने और थोपने में बहुत अंतर है 
कोई आपकी खुशियों को तो दीमक की तरह चट कर खोखला करता जाएं और अपनी खुशियों को सर पर सवार कर दे तो आपके पास आक्रोश के अलावा कुछ बचता है क्या ?????
यही हो रहा है होली ,दीवाली पर प्रदूषण, पानी औए नकली मिठाई का शोर मचा ऐसा कर देते हैं कि नयी पीढ़ी तो तौबा करती नज़र आती है
 हाँ आज क्रिसमस झूम कर मनाएगी ,नए साल के लिए कार्यक्रम बन रहे होंगे अभी से
 उस समय होने वाली आतिशबाजी भी लगता है पर्यावरण में सुधार लाती है ??
और ये परिणाम है सालों विदेशी सोच वाली सरकार के सत्ता में बने रहने का,जिसने भारतीय संस्कृति को छिन्न-भिन्न करने में कोई कसर नहीं छोड़ी,वामपंथ को बढ़ावा दिया और ईसाइयत का बीज गहराई तक रोप दिया जो अब वट वृक्ष बन गया है
UPA के दस साल ने तो देश को इटली बनाने का पूरा प्रयास किया और अगर समय रहते परिवर्तन न होता तो पता नहीं अभी और क्या हो रहा होता ??????
क्रिसमस ट्री के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई भी किसी को खराब नहीं लगती 
अब तो  फादर जॉन जैसे लोग टीवी पर आकर ऐसे आँख दिखाते हैं जैसे ईसाई धर्म भारत का मूल धर्म हो 

Thursday, 20 October 2016

#यादेंशरदपूर्णिमा

#यादेंशरदपूर्णिमा#चन्द्रमा#अमृत#
बचपन जैसी न चांदनी ,न चन्द्रमा ,न वो खुला सा आँगन और न ही शरद का अनुभव :)शरद कम ग्रीष्म ज़्यादा :)
स्मृति की गर्त हटाती हूँ तो दूध वाली बड़ी सी डोलची में मम्मी की बनाई स्वादिष्ट खीर जाली से ढकी है और आँगन में कपड़े सुखाने वाले तार पर बन्धी है ,सर्द अहसास है वहीं चटाई बिछा शॉल ओढ़े हम सब विराजमान हैं :) 
हंसी मज़ाक ,हल्ला-गुल्ला 
इस सबके बीच हाथ में धागा और सुई !!
चांदनी के धवल प्रकाश में सुई में धागा डालना है जिससे आँखों की रोशनी तेज़ हो सके | ये प्रक्रिया बार-बार दोहरानी है और फिर ये क्या !! यहां तो प्रतिस्पर्धा शुरू हो गयी 'मेने 30 बार तूने 20 बार 2-3 घण्टे इसी तरह बीत गए ,आँखें बोझिल हो चलीं आलस आने लगा तो चलो खीर अंदर रखे चटाई उठाये और चले निद्रा देवी के आगोश में :) सुबह स्वादिष्ट अमृतमयी खीर का प्रसाद वितरण होगा |
ये थी शरद पूर्णिमा की मधुर स्मृति :-D
सभी मित्रों को शरद पूर्णिमा की गुनगुनी शुभकामनाएं |


Monday, 26 September 2016

सिंधु जल समझौता

# सिधुजलसंझौता
DNA देखा तो समझ आया कि----
दुनिया का पहला जल समझौता जिसमें विश्व बैंक का हस्तक्षेप !
अगर जल रोकते हैं तो कोई प्रबन्ध नही ,
बाँध बनाना भी चाहे तो 10-15 साल चाहिए |
अब प्रश्न ये कि कश्मीर समस्या हो या सिंधु समझौता
, हर समस्या को सुलझाने के लिये पंचायत का हस्तक्षेप क्यों ?
 इस समस्या को जन्म देने और इसे बेहद जटिल बनाने वाले ही आज 'कुछ करो-कुछ करो' चिल्ला रहे हैं ये और बात है कि 60-65 सालों में भी इस दिशा में कदम उठा कोई बाँध तक नही बना पाये जो आज रोके गए पानी की व्यवस्था कर पाते | ये कोई आज की समस्या तो है नहीं |
खैर अब पानी रोकना तो एकदम शायद सम्भव नही तो निर्णय कुछ सेंध लगाने और पानी पिला-पिला कर मारने का ही लगता है