Friday, 3 November 2017

खिचड़ी हुई ग्लोबल

दिल्ली में 3 से 5 नवंबर तक वर्ल्ड फू़ड फेस्टिवल ...
अब भारतीय पतीली के साथ-साथ पूरी दुनिया में फैलेगी, भारतीय पारंपरिक खिचड़ी की सौंधी महक 🙂🙂🙂
देसी घी के साथ गर्मागर्म खिचड़ी का स्वाद लगभग हर भारतीय की जुबां पर होगा लेकिन अब जल्दी ही पूरी दुनिया इस स्वाद का लुत्फ उठाने वाली है

'खिचड़ी' अमीर हो या गरीब, हर रसोई की शान है 
किसी थाली में चटनी,पापड़ ,घी ,अचार के साथ तो किसी थाली में बिन अचार ही शोभा बढ़ाती है
लेकिन ये खिचड़ी है 😊 जब पकती है तो बड़े-बड़े चेहरों पर मुस्कान ले आती है
आशा है ये खिचड़ी की सौंधी महक दूर तक जायेगी ,मुंह में पानी ज़रूर ले आएगी

Sunday, 25 December 2016

सोच विचार

किसी की भावना को आहत करने का कोई इरादा नहीं 
त्यौहार जीवन की एकरसता को ताज़गी और ख़ुशी से भर देते हैं ,सर्व धर्म समभाव की विचार धारा वाले वाले इस देश में असंख्य त्यौहार मनाये जाते हैं 
कोई भी त्यौहार मनाने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए 
अगर आपकी ख़ुशी में कोई शामिल होता है तो आपका भी कर्तव्य है उसकी खुशियां बढ़ाई जाएँ
लेकिन अपने आप खुशियों में शामिल होने और थोपने में बहुत अंतर है 
कोई आपकी खुशियों को तो दीमक की तरह चट कर खोखला करता जाएं और अपनी खुशियों को सर पर सवार कर दे तो आपके पास आक्रोश के अलावा कुछ बचता है क्या ?????
यही हो रहा है होली ,दीवाली पर प्रदूषण, पानी औए नकली मिठाई का शोर मचा ऐसा कर देते हैं कि नयी पीढ़ी तो तौबा करती नज़र आती है
 हाँ आज क्रिसमस झूम कर मनाएगी ,नए साल के लिए कार्यक्रम बन रहे होंगे अभी से
 उस समय होने वाली आतिशबाजी भी लगता है पर्यावरण में सुधार लाती है ??
और ये परिणाम है सालों विदेशी सोच वाली सरकार के सत्ता में बने रहने का,जिसने भारतीय संस्कृति को छिन्न-भिन्न करने में कोई कसर नहीं छोड़ी,वामपंथ को बढ़ावा दिया और ईसाइयत का बीज गहराई तक रोप दिया जो अब वट वृक्ष बन गया है
UPA के दस साल ने तो देश को इटली बनाने का पूरा प्रयास किया और अगर समय रहते परिवर्तन न होता तो पता नहीं अभी और क्या हो रहा होता ??????
क्रिसमस ट्री के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई भी किसी को खराब नहीं लगती 
अब तो  फादर जॉन जैसे लोग टीवी पर आकर ऐसे आँख दिखाते हैं जैसे ईसाई धर्म भारत का मूल धर्म हो 

Thursday, 20 October 2016

#यादेंशरदपूर्णिमा

#यादेंशरदपूर्णिमा#चन्द्रमा#अमृत#
बचपन जैसी न चांदनी ,न चन्द्रमा ,न वो खुला सा आँगन और न ही शरद का अनुभव :)शरद कम ग्रीष्म ज़्यादा :)
स्मृति की गर्त हटाती हूँ तो दूध वाली बड़ी सी डोलची में मम्मी की बनाई स्वादिष्ट खीर जाली से ढकी है और आँगन में कपड़े सुखाने वाले तार पर बन्धी है ,सर्द अहसास है वहीं चटाई बिछा शॉल ओढ़े हम सब विराजमान हैं :) 
हंसी मज़ाक ,हल्ला-गुल्ला 
इस सबके बीच हाथ में धागा और सुई !!
चांदनी के धवल प्रकाश में सुई में धागा डालना है जिससे आँखों की रोशनी तेज़ हो सके | ये प्रक्रिया बार-बार दोहरानी है और फिर ये क्या !! यहां तो प्रतिस्पर्धा शुरू हो गयी 'मेने 30 बार तूने 20 बार 2-3 घण्टे इसी तरह बीत गए ,आँखें बोझिल हो चलीं आलस आने लगा तो चलो खीर अंदर रखे चटाई उठाये और चले निद्रा देवी के आगोश में :) सुबह स्वादिष्ट अमृतमयी खीर का प्रसाद वितरण होगा |
ये थी शरद पूर्णिमा की मधुर स्मृति :-D
सभी मित्रों को शरद पूर्णिमा की गुनगुनी शुभकामनाएं |


Monday, 26 September 2016

सिंधु जल समझौता

# सिधुजलसंझौता
DNA देखा तो समझ आया कि----
दुनिया का पहला जल समझौता जिसमें विश्व बैंक का हस्तक्षेप !
अगर जल रोकते हैं तो कोई प्रबन्ध नही ,
बाँध बनाना भी चाहे तो 10-15 साल चाहिए |
अब प्रश्न ये कि कश्मीर समस्या हो या सिंधु समझौता
, हर समस्या को सुलझाने के लिये पंचायत का हस्तक्षेप क्यों ?
 इस समस्या को जन्म देने और इसे बेहद जटिल बनाने वाले ही आज 'कुछ करो-कुछ करो' चिल्ला रहे हैं ये और बात है कि 60-65 सालों में भी इस दिशा में कदम उठा कोई बाँध तक नही बना पाये जो आज रोके गए पानी की व्यवस्था कर पाते | ये कोई आज की समस्या तो है नहीं |
खैर अब पानी रोकना तो एकदम शायद सम्भव नही तो निर्णय कुछ सेंध लगाने और पानी पिला-पिला कर मारने का ही लगता है

Wednesday, 14 September 2016

हिंदी दिवस

हिंदी भाषी प्रदेश से हूँ
हिंदी को प्यार करने वाले परिवार से हूँ ,हमेशा माता -पिता को अपना खाली समय पुस्तकों के बीच बिताते देखा
 एक छोटा सा पुस्तकालय भी देखा जो स्थानानुसार एक अलमारी में हमेशा बना रहा .........
जहाँ हम बच्चों के लिए भी हिंदी मासिक, पाक्षिक और अनेक पत्रिकाओं का प्रबंध हमेशा रहा ........
.हिंदी की क्लिष्टता को समझना और सहज भाव से अपनाना सिखाया लोकप्रिय लेखिका 'शिवानी' ने ........
जिनके दर्जनों उपन्यास आज भी हमारी धड़कन बने हैं ...
आज हमारे बीच नहीं हैं ...लेकिन उनकी लेखनी उनकी उपस्थित का सदा आभास देती रहेगी ........
हिंदी के हर शब्द को अपनाना स्वभाव में सम्मिलित रहा है ......
हिंदी भाषी समाचार पत्र की वर्ग पहेली भरना प्रिय शगल रहा .........
.शिक्षा--दीक्षा सरकारी स्कूल में हुई जहाँ एक सहज भाषा बोलते रहे ..
.लेकिन हिंदी माध्यम में कक्षा आठ के बाद हिंदी विषय पढने को नहीं मिला क्यों कि नियमानुसार विज्ञान वर्ग के लिए हिंदी विषय नहीं था 
लेकिन कोई असर नहीं हुआ ...............
आज भी हिंदी ही प्राथमिकता है .......

.जिस स्कूल में अध्यापन कर रही हूँ  वहां पहले अंग्रेजी पर ही ध्यान दिया जाता था जैसा कि सब जानते हैं हिंदी को गौण बना रखा था .......
.लेकिन में सुविचार हिंदी में लिखने प्रारम्भ किये तो उन्होंने मना करवा दिया .........
मैंने उनसे बात की और कहा जो भी हम श्यामपट पर लिखे वो कम से कम समझ आना चाहिए ........
हम लिख देते हैं कोई ध्यान नहीं देता ........
.कम से कम सप्ताह में तीन दिन हिंदी में भी लिखवाइए ........
उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया ...........
फिर उनकी बेटी ने स्कूल जाना प्रारंभ किया तो उन्हें लगा शायद मेरा कहना सही था ..........
और उन्होंने मेरी बात को मान लिया ...........
हिंदी का लेख भी सुधरवाने पर ध्यान दिया जाने लगा

जब में वहां बोलती थी तो कई अध्यापिका जो हिंदी भाषी नहीं थी कहती आप की हिंदी बहुत अच्छी है ...में मन में सोचती अगर आप उत्तर प्रदेश जाइए तो ऐसी ही अच्छी हिंदी आपको हर मुख से मिलेगी ...........
आज हिंदी दिवस पर मन में ये सब उमड़ आया .............
हिंदी मेरी पहचान है ........
.मेरा अभिमान है .........
भारत की शान है ..........
बस मेरी इस राष्ट्र भाषा को अपमानित ना होना पड़े कहीं .........
इसके सम्मान को बचाए रखना है और नयी पीढ़ी को भी इसकी अहमियत समझानी होगी
आज हिंदी दिवस पर समस्त हिंदी प्रेमियों को अनेक शुभकामनाएं ........

हिंदी को जानिये ................
जय हिंदी ...जय हिन्दुस्तान ............:)))))))))...........

Monday, 5 September 2016

आभार

कदम-कदम पर दिया गया अनेकों लोगो का मार्ग दर्शन आज यहां तक ले आया ,माता-पिता के बाद औपचारिक प्राथमिक शिक्षा से लेकर अंतिम औपचारिक शिक्षा तक यात्रा बहुत रोचक ,ज्ञानवर्द्धक और स्मरणीय रही |
नही जानती आज कौन कहाँ हैं ,कैसे हैं लेकिन इस यात्रा में हर पड़ाव पर समस्त सहयोगियों ,मार्गदर्शकों का हार्दिक अआभार ,सभी को सादर नमन |
गुरु उत्सव की सभी को हार्दिक बधाई 

Wednesday, 24 August 2016

क़र्ज़ चुकाना है

पाकिस्तान मणि शंकर अय्यर को बेहद पसन्द और सलमान खुर्शीद को बलूचिस्तान हस्तक्षेप गलत लगता है |
'दोनों ही लाहौरी नमक का क़र्ज़ अदा कर रहे हैं' |