Friday, 9 May 2014

शहादत का डंका पीटने वाली भारत की विदेशी सरकार की एक और पोल खुली----!!!



'उन्होंने दावा किया कि
नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मौत 17 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी.
नेताजी 20 अगस्त 1945 को बर्मा में छितांग नदी के किनारे पड़े मिले थे.
जापान के सैनिकों ने उन्हें वहां से उठा लिया था.
इन आंखों ने जापानी सैनिकों द्वारा नेताजी को उठाकर ले जाते हुए देखा है.
सरकार ने बगैर मेरा बयान दर्ज किए ही नेताजी की मौत की अफवाह उड़ा दी.'

कर्नल' निज़ामुद्दीन की युवावस्था की तस्वीर
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वाराणसी के रोहनिया की रैली में पैर छू कर आशीर्वाद लिया नरेंद्र मोदी ने
सुभाष चंद्र बोस के ड्राइवर और अंगरक्षक रह चुके हैं 
कर्नल निजामुद्दीन और इनकी उम्र 115 साल. मंच पर मोदी ने इनका सम्मान किया.

नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मौत 17 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी.
नेताजी 20 अगस्त 1945 को बर्मा में छितांग नदी के किनारे पड़े मिले थे.
जापान के सैनिकों ने उन्हें वहां से उठा लिया था.

कर्नल' निज़ामुद्दीन का घर, जिसके ऊपर तिरंगा लगा हुआ है.

यह दावा किसी और का नहीं, 114 वर्षीय कर्नल निजामुद्दीन का है.

कर्नल निजामुद्दीन उन दिनों नेताजी के निजी ड्राइवर व अंगरक्षक थे.
निजामुद्दीन बुधवार को काशी विद्यापीठ में विशाल भारत संस्थान द्वारा आयोजित समारोह में भाग लेने आए थे.
इस दौरान उन्होंने बताया कि नेता जी को अंतिम बार उन्होंने खुद बर्मा की छितांग नदी के किनारे देखा था.

उन्होंने दावा किया कि इन आंखों ने जापानी सैनिकों द्वारा उन्हें उठाकर ले जाते हुए देखा है.
सरकार ने बगैर मेरा बयान दर्ज किए ही नेताजी की मौत की अफवाह उड़ा दी.
कर्नल ने बताया कि नेता जी 12 सिलेंडर वाली गाड़ी से चलते थे.
वह बेहद साधारण तरीके से रहते थे.
सुरक्षा के नाम पर उनके साथ मात्र तीन चार लोग थे.
मैं उनकी गाड़ी चलाता था.
साक्ष्य के तौर पर उन्होंने आजाद हिंद फौज का परिचय पत्र भी दिखाया.

11 भाषाओं के जानकार हैं कर्नल
कर्नल निजामुद्दीन की हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, जर्मन, जापानी, बांग्ला सहित ग्यारह भाषाओं पर पकड़ हैं.

अचूक निशानेबाज
कर्नल अचूक निशानेबाज भी माने जाते हैं.
उन्होंने बताया कि सन 1945 में युद्ध के दौरान ब्रिटिश जहाज मार गिराया था.

नेताजी के कहने पर लौट आया.--------
मुबारकपुर आजमगढ़ के ग्राम ढकवां निवासी कर्नल निजामुद्दीन पांच जून 1969 में सिंगापुर से भारत लौटे.
उन्होंने बताया कि
 सिंगापुर में फंसे सभी भारतीयों को वापस भेजने के बाद नेताजी ने लौटने का आदेश दिया था.
नेताजी के आदेश पर ही हम भारत आ गए.

11 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन भारत का 'ग्लेडस्टोन' और ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (10-05-2014) को "मेरी हैरानियों का जवाब बस माँ" (चर्चा मंच-1608) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. bahut hi rochak aur sahi baat netaji ke baare me batayi gayi hai.........dhanyvaad

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  4. हमारी सरकार को नेहरू परिवार की शहादत ही याद है जिसकी कीमत वे इस चुनाव में फिर मांग रहे हैं न जाने और कब तक देश को इसे चुकाना होगा सुभाष बॉस व अन्य स्वतंत्रता सेनानियों से इन्हें क्या अभी एक लोकल छुटभैये कांग्रेसी नेता मुझ से पूछ रहे थे ये भा ज पा वाले इस निज़ामुद्दीन को कहाँ से निकाल कर लाये हैं?उन्हें उनके सुभाष बॉस के ड्राइवर होने पर शक था अब अंदाज लगा लीजिये की वे सेनानियों का कितना सन्मान करते है?

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    1. जी आपना सच कहा और हम सभी जानते है ये बात .............ललेकिन बहुत सुखद है इनका इस तरह से सामने आना

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  5. आइए कितने ही रहस्य हैं जिनपर सरकार पर्दा डाले हुए है ...
    ये बाहर आने चाहियें अब ...

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