Friday, 17 January 2014

......ये भी जिंदगी ---













शीत भयंकर आज पड रहा सोच रही एक अबला 
मेरे नन्हे के तन पर है नाम मात्र का झबला 

नील गगन के साए में वो कथरी में लिपटा है 
गर्मी पाने की चाहत में अपने में सिमटा है 

सजल नेत्र से देखा माँ ने ,बांहों में उठाया 
गोदी में ममता से लेकर ,सीने से लगाया 


भींच लिया माँ ने नन्हे को ,दो आंसू टपकाए
छिपा लिया माँ ने आँचल में ,उष्मा कुछ मिल जाए

बेरहमों की दुनिया में नन्हे ,क्या करने तुम आये
सो गया बेफिक्र हो नन्हा , सीनें में मुँह छिपाए

6 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन इंटरनेशनल अवॉर्ड जीतने वाली पहली बंगाली अभिनेत्री थीं सुचित्रा मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. सादर आभार और में उपस्थित नहीं हो सकी , क्षमाप्रार्थी हूँ .....

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (19-01-2014) को "सत्य कहना-सत्य मानना" (चर्चा मंच-1496) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. सादर आभार और में उपस्थित नहीं हो सकी , क्षमाप्रार्थी हूँ .....

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