Monday, 13 January 2014

मकर संक्रान्ति का ऐतिहासिक महत्व


माना जाता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। 

चूँकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है।
 महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रान्ति का ही चयन किया था। 
मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिल गयी थीं।

शुभ हो

मकर संक्रांति , पोंगल पर्व आप सबके लिए शुभ हो ,मंगल कारी हो ........
जय उत्तरायणी ...............शुभम

Tuesday, 31 December 2013

२०१४ के लिए हार्दिक शुभकामनायें ......

२०१३ का अंतिम दिन ....ग्रेगोरियन कैलेंडर का २०१३ बीता और एक कदम आगे बढ़ आये ....
 अपने बीते समय का लेखा-जोखा ले ,२०१४ के प्रवेश द्वार पर खड़े हैं .......
........मुड़ कर देखते हैं तो बहुत कुछ है .....
.......कुछ है समेट ले जाए , बहुत कुछ है छोड़ आगे बढ़ जाएँ ....
............ खट्टे-मीठे पल छोड़ चले पग चिन्ह ....
आने वाला ---
हर पल खुशियाँ समेट लाये ............ संघर्ष , सफलता बन जाए
........आँखों में झिलमिलाते साकार हो स्वप्न.....
२०१४ का सूर्य एक नया सवेरा ले सबके जीवन में स्वर्णिम प्रकाश ले आये ..........
.....प्यार , स्नेह का ध्वज फहराए .........द्वेष ,ईर्ष्या यहीं रह जाए .........
बस यही चाह , यही कामना ....
कुछ अच्छा और नया करंगे इसी संकल्प के साथ आगे कदम बढायें ............
सबको आगामी वर्ष २०१४ के लिए हार्दिक शुभकामनायें .......

Monday, 16 December 2013

शायद प्रकाश हो ....

ना कोई जानता था , ना पहचानता था ! 
जिंदगी का सफ़र आरामदायक भी नहीं था |लेकिन रोज़ नया संघर्ष था ....आँखों में सपने थे और उन्हें साकार करने की चाह थी , हिम्मत थी , जिद थी ...........तो कोई बाधा बड़ी नहीं लगती थी .........||
हर पग सफलता की और ही बढ़ रहा था .........साकार हो ही जाते स्वपन कि ............अचानक ऐसा हुआ जो कल्पना से दूर था .......कभी सोचा ना था .........लेकिन हुआ क्यों कि यही होना था शायद ........समय बहुत क्रूर हो गया ......और उसे जाना पडा .......
आज पैसा है ,नाम भी है ,लोग जानते हैं .......बदल गयी है दुनिया .......................लेकिन कितनी बड़ी कीमत चुकाई ........ये सिर्फ और सिर्फ माता - पिता ,भाई - बहन और परिवार का दर्द जानता है ............
....................निर्भया तुम्हे समाज की श्रधान्जली.......तुम चली गयी लेकिन परिवर्तन की क्षीण लौ जला गयी हो .................शायद प्रकाश हो .......????

Saturday, 2 November 2013

सभी मित्रों को दीपों का त्यौहार शुभ हो ,मंगलमय हो ...........


दीपोत्सव की बेला आई , अंजुली भर खुशियाँ ले आई
आँचल में ले आओ समेट, ईश्वर की ये अमूल्य भेंट

बिखर रहा है पुंज प्रकाश , चहुँ और है हर्ष -उल्लास 
आशा दीप जले हर मन में , उजियारा है घर -आँगन में

चाँद विहीन सूना आकाश , धरा है पुलकित अहा !! प्रकाश
नन्ही नहीं लौ मुस्काई , खुशियाँ समेट जहाँ की लायीं

जगमग हो जीवन हर जन का , तम हर ले मुरझाये मन का
तृप्त मुस्कान हो सब अधरों पर , चाह यही है इस अवसर पर

कर बद्ध प्रणाम गुरुजनो को , आशीष प्यार बाल -वृन्दों को .................

यही तो जिंदगी है

कहीं -------------
टिमटिमाते दीप की लौ की भाँति फडफाड़ाती ,
उदास सूनी आँखों के साथ निराशा की गर्त में डूबकी लगाती

तो कहीं -----------
मुस्कराती , कहकहे लगाती आशा दीप जलाती
कहीं -------------
दिलों में पलते ,आँखों में सजते साकार स्वप्न

कहीं -------------
बिना आवाज़ के टूटते , चूर हुए स्वप्न
हर सुबह एक नयी सोच के साथ शुरू होती है 

हर पल , पग -पग रोज़ नए संघर्ष से दो -चार होती है
लेकिन सब इसे ही पाना चाहते हैं , इसे ही गले लगाते हैं

नहीं ये आसान , बेहद जटिल है ...जटिल , बेहद जटिल है
................हाँ यही तो जिंदगी है ......इसी का नाम जिंदगी है .....
.

Friday, 13 September 2013

हिंदी दिवस पर विशेष ........




















हिंदी तेरी अजब कहानी
तू मेरे सपनो क़ी रानी
तेरे मर्म से परिचय मेरा 
तुझसे मेरा शाम -सवेरा 
अपने ही घर में अनजान
खो गयी तेरी पहचान
पहन मुखौटा विदेशियों का 
अस्मत क़ी तेरी नीलाम 
और सभी भाषा भी हमको 
लगती तेरी बहन समान 
पर हम सह ,अब नहीं पा रहे ,
हो यहाँ ,तेरा अपमान
नव पीढी तुझसे अनजान
नहीं उन्हें ,तेरा है ज्ञान
वो हैं ,तुझको तुच्छ मानते 
नहीं तेरा स्थान जानते 
मोह भंग कराना होगा 
तेरा सम्मान दिलाना  होगा
बिंदी तू मेरे भारत क़ी
 हिंदी तू मेरा अभिमान
सुंदर वर्णों से अलंकृत 
बढ़ा रही भारत का मान
स्वर ,व्यंजन बच्चे हैं तेरे 
तू है उनकी माँ समान 
हिंदी मुझको गर्व यहाँ है 
तुझसे है मेरी पहचान