--जिंदगी में क्या नहीं है ? समझो सब कुछ यहीं- कहीं है धूप -छाँव है , हँसी -ख़ुशी है , सुख है ,दुःख है कुछ नहीं कम , सब कुछ एक साज़ पर बजता एक ही है इसकी सरगम...!!! अपनी अकुलाहट , छटपटाहट सब कुछ इन शब्दों में सहेजने का प्रयास करती हूँ मन को शांत करने का , एक -दूसरे के मन में झाँकने का , अपने ही विचारों को उकेर कर सामने लिखा देखने का एक बहुत सुंदर माध्यम है ........... कई बार शब्द साथ नहीं देते लेकिन अक्सर कुछ न कुछ शब्दों के माध्यम से बाहर आता रहता है ............
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Sunday, 21 July 2013
लेखा -जोखा
'मोदी ने ग्यारह सालों में गुजरात में क्या किया' .......माकन
अब सूप तो ठीक छलनी का सवाल गले नहीं उतरता
ग्यारह साल के रिपोर्ट कार्ड से पहले 66 साल का लेखा हो जाए 'साहब' ........????
अब सूप तो ठीक छलनी का सवाल गले नहीं उतरता
ग्यारह साल के रिपोर्ट कार्ड से पहले 66 साल का लेखा हो जाए 'साहब' ........????
.. शरद यादव का बिहार में बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों का दौरा
........नाव तैयार .....
चमचे आस-पास ........नौका विहार पर चले .................रास्ते में काजू-किशमिश और बढ़िया बिस्किट का नाश्ता ..........कुछ देर निंदिया रानी ने भी आगोश में ले लिया .....चारों और पानी ही पानी था .........ठंडी हवा थी ..बड़ा अच्छा लग रहा था
......लुत्फ़ आया ही था कि........एक किनारे कुछ भूखे - नंगे बच्चे और और मजदूर से दिखने वाले लोग दिखने लगे .....उफ्फ्फ ये लोग भी न !!!!!!!...
सब कुछ आनंद विहीन लगने लगा कहाँ से आ गए ये लोग ...??
............किसी ने कान में कहा
'सर हम बाढ़ पीड़ित गाँव में आ गए हैं ..........!!!!!!!!............ .'
ओह !! चौंक उठे मंत्रीजी .............................. ........
.............................. .................... शरद यादव का बिहार में बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों का दौरा
चमचे आस-पास ........नौका विहार पर चले .................रास्ते में काजू-किशमिश और बढ़िया बिस्किट का नाश्ता ..........कुछ देर निंदिया रानी ने भी आगोश में ले लिया .....चारों और पानी ही पानी था .........ठंडी हवा थी ..बड़ा अच्छा लग रहा था
......लुत्फ़ आया ही था कि........एक किनारे कुछ भूखे - नंगे बच्चे और और मजदूर से दिखने वाले लोग दिखने लगे .....उफ्फ्फ ये लोग भी न !!!!!!!...
सब कुछ आनंद विहीन लगने लगा कहाँ से आ गए ये लोग ...??
............किसी ने कान में कहा
'सर हम बाढ़ पीड़ित गाँव में आ गए हैं ..........!!!!!!!!............
ओह !! चौंक उठे मंत्रीजी ..............................
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क्या होगा ?
टैक्सी और आटो वाले बैज पहनेँगे ,लिखा होगा-"I RESPECT WOMEN "
.................................................................. - FROM----पर्यटन मंत्रालय
और बड़ी गाड़ियोँ मेँ घूमते बिगड़े दिल शहज़ादे कौन सा बैज लगायेँगे !!
उनका का कया होगा ?
.................................................................. - FROM----पर्यटन मंत्रालय
और बड़ी गाड़ियोँ मेँ घूमते बिगड़े दिल शहज़ादे कौन सा बैज लगायेँगे !!
उनका का कया होगा ?
Sunday, 30 June 2013
तम की चादर
तम की चादर ओढ़ सांझ ने ,
धीरे-धीरे पाँव पसारा
आँख मिचौली खेल ज़रा सी ,,
तम उर में छिप गया उजाला
पलकों में सिमटे ख्वाबों ने ,
थोड़ी सी लेकर अंगड़ाई
थोड़ी सी लेकर अंगड़ाई
अभिनन्दन करके निद्रा का,
सीमा अपनी और बढाई
सीमा अपनी और बढाई
समां गए सपने अंखियों में,
पलक लगे ढलके-ढलके
पलक लगे ढलके-ढलके
लोरी भी गा रही ख़ामोशी,,
सहलाती हलके-हलके
सहलाती हलके-हलके
Thursday, 20 June 2013
ये भी एक सच !!!!!
केदारनाथ मंदिर के भीतर कोई नुकसान नहीं हुआ है।
उत्तराखंड में बाढ़ की सबसे ज्यादा विभीषिका झेलने वाले केदारनाथ में मंदिर गर्भगृह को छोड़कर कुछ नहीं बचा है-------
एक कारण ये भी होगा कि इसका निर्माण वैज्ञानिक आधार पर हुआ होगा ..
भारत सालो पहले से ही तकनीकी क्षेत्र में बेहतर रहा है ..........पहले आज की तरह
भेड -चाल तो थी नहीं ......ना ही खाना-पूरी होती थी .......इमानदारी और निष्ठा से कार्य होता था ... ............बड़े ही नियोजित और सुचारू ढंग से निर्मित रहा होगा ये मंदिर .......
बल्कि जगह -जगह पहाडो पर सालों पुराने हमारे ये मंदिर अपनी विशेष निर्माण विधि से ही आज भी सुरक्षित हैं .............गुफाओं में कंदराओ में जहाँ -तहां मंदिर मिल जाते हैं और हम इनके आस -पास अवैध निर्माण कर इन्हें खोखला कर रहे हैं ..................और भयावह परिणाम भी झेल रहे हैं
भारत सालो पहले से ही तकनीकी क्षेत्र में बेहतर रहा है ..........पहले आज की तरह
भेड -चाल तो थी नहीं ......ना ही खाना-पूरी होती थी .......इमानदारी और निष्ठा से कार्य होता था ... ............बड़े ही नियोजित और सुचारू ढंग से निर्मित रहा होगा ये मंदिर .......
बल्कि जगह -जगह पहाडो पर सालों पुराने हमारे ये मंदिर अपनी विशेष निर्माण विधि से ही आज भी सुरक्षित हैं .............गुफाओं में कंदराओ में जहाँ -तहां मंदिर मिल जाते हैं और हम इनके आस -पास अवैध निर्माण कर इन्हें खोखला कर रहे हैं ..................और भयावह परिणाम भी झेल रहे हैं
Thursday, 13 June 2013
बरखा रानी करे निहाल ----------
1-बार -बार मेघा गरजाए
धरा पुलक -पुलक हुई जाए
2-अंधियारा छाया है दिन में
चमके बिजली दूर गगन में
3-घुमड़ -घुमड़ कर मेघा आये
पिहू पपीहा शोर मचाये
४-पल-पल धरती दरक रही है
बिन पानी के सिसक रही है
५-गुनगुनाती मेघ मल्हार
बरखा रानी खड़ी है द्वार
६-झमझमाझम झम-झम , झम-झम
भीग रहा है हर अंतर मन
७-रिमझिम -रिमझिम बरस रहा है
मन भी संग -संग भीग रहा है
८-ताप सहे हो गए बेहाल
बरखा रानी करे निहाल ....................
धरा पुलक -पुलक हुई जाए
2-अंधियारा छाया है दिन में
चमके बिजली दूर गगन में
3-घुमड़ -घुमड़ कर मेघा आये
पिहू पपीहा शोर मचाये
४-पल-पल धरती दरक रही है
बिन पानी के सिसक रही है
५-गुनगुनाती मेघ मल्हार
बरखा रानी खड़ी है द्वार
६-झमझमाझम झम-झम , झम-झम
भीग रहा है हर अंतर मन
७-रिमझिम -रिमझिम बरस रहा है
मन भी संग -संग भीग रहा है
८-ताप सहे हो गए बेहाल
बरखा रानी करे निहाल ....................
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